मजदूर अफराजुल की बेरहमी से हत्या की जाती है, घटना का वीडिओ सोशल मीडिया पर डाल कर हत्यारा शम्भूलाल खुद को हिंदुत्व का योद्धा बताता है तो सवाल उठता है कि ऐसी सांप्रदायिक कट्टरता आती कहाँ से है, इनका पोषक कौन है ?

एक ऑडियो टेप से इसका खुलासा हुआ है कि कैसे कुछ हिन्दुत्ववादी संगठन इस घोर अपराधी की मदद करने में लगे हैं।

भारत में धार्मिक कट्टरता एक पुराना मुद्दा रहा है। अक्सर धर्म के नाम पर तकरार भी समुदायों के बीच में देखने को मिलती है। लेकिन इसके अलावा एक आपसी भाईचारा भी इस देश में समाज के बीच रहा है और सबसे ऊपर मानवता रही है।

चाहे कितने ही हालात ख़राब रहे हो लेकिन लोगों ने मानवता को पहले तरजीह दी है और इसके विरुद्ध खड़े होने वालों की आलोचना की है। बिना धर्म जाने भूखें लोगों को खाना खिलने से लेकर गरीबों की मदद करने में मानवता ने ही इस सन्दर्भ में सबसे बड़ी भूमिका निभाई है।

लेकिन अब देश में जिस तरह का माहौल बन रहा है उससे लोग मानवता को भी नकार धार्मिक कट्टरता को अपना रहे हैं। हाल ही में राजस्थान के राजसमंद में हुई घटना की लोगों ने अपने सामाजिक और राजनीतिक विचारों से परे होकर एक आवाज़ में आलोचना की।

इस घटना में शंभूलाल नाम के एक अतिवादी ने एक मुस्लिम मज़दूर को मार कर जला दिया था। कानून से बखौफ शंभूलाल ने इस घटना का विडियो भी बनाकर सोशल मीडिया में पोस्ट कर दिया।

मगर अब समाज में कुछ ऐसे तत्वों की संख्या इतनी बढ़ गई है कि वो इस तरह की जघन्य अपराध को भी सही ठहराकर इस घटना के अपराधी शंभूलाल की मदद कर रहे हैं।

ऐसे संगठन अस्तित्व में आ गए हैं जो ये कार्य कर रहे हैं। ऐसे ही दो संगठनों की बातचीत का ऑडियो वायरल हो रहा है जिसमें वो शम्भुनाथ की मदद करने के लिए बात कर रहे हैं। साथ ही उसे एक हीरो बता रहे हैं।

एक आवाज़ राजस्थान से किसी महिला की है और दूसरी भोपाल से ‘हिन्दू स्वाभिमान’ संगठन के एक कार्यकर्ता की। दोनों की बातचीत से साफ़ ज़ाहिर है कि  दोनों बेहद कट्टर विचार रखते हैं। ऑडियो में महिला यह भी कह रही है कि देश का कानून शम्भूलाल के आगे कुछ नहीं है। दोनों ही देश के कानून को कुछ नहीं समझते।

ऑडियो में ये भी कहा गया है कि इन संगठनों को राजनैतिक मदद भी मिलती है। राजस्थान की महिला ये बार-बार कहती सुनाई पड़ रही है कि उन्हें राजनैतिक रूप से  मदद हासिल है। गौरतलब है कि राजस्थान में भाजपा की सरकार है। दूसरा संगठन मध्यप्रदेश में है और वहां भी भाजपा की ही सरकार है।

राजनीतिक और सामाजिक विचार अपनी जगह है और सबको अपने विचार रखने की आज़ादी भी है लेकिन इस तरह से मानवता विरोधी कार्यों को सही ठहराना इस देश में अपराधों की एक ऐसी प्रवृति को बढ़ावा देगा जिसका प्रभाव राजनीति, समाज, आपसी रिश्तें और कानून, संविधान, लोकतंत्र सभी पर होगा।

गौरक्षा की तरह कथित लव जिहाद के नाम पर किसी को भी सिर्फ मारना नहीं बल्कि जलादेना तक आसान होगा। इसका शिकार केवल अल्पसंख्यक ही नहीं हर वो समुदाय और इंसान होगा जो इस तरह के लोगों की सोच से सहमत नहीं होगा। कथित लव जिहाद एक ऐसा खेल है जिसके द्वारा इस देश की महिलाओं की स्वतंत्रता को धीरे-धीरे डर और तथाकथित संस्कृति के नाम पर छीन लिया जाएगा।

लेकिन ये सब एक दिन में शुरू नहीं हुआ है। समाज के भीतर धीरे-धीरे इस ज़हर को भरा गया है। जब इस देश में मानवतावाद के प्रतीक और राष्ट्रपिता महात्मा गाँधी को मारने वाले की पूजा शुरू की गई थी तभी इस विचार की शुरुआत हो गई थी। आरएसएस जैसे संगठनों ने नाथूराम गोडसे को सही ठहराना शुरू किया था। उस शुरुआत का अंजाम देश आज देख रहा है।

जब हर बात पर प्रतिक्रिया देने वाले प्रधानमंत्री इस तरह की घटनाओं पर चुप्पी बनाए रखते हैं। तब ऐसे संगठनों में इस तरह के जघन्य अपराध को समर्थन देने की हिम्मत पैदा होती है।

– (भोपाल से पुरुष स्वर, तंज़ कसते हुए) वसुंधरा राजे सरकार कितनी हिंदुवादी है, ये तो आप समझ सकते हैं …- (अलवर से स्त्री स्वर) सर, अगर ये कभी मिल जाएँ ना तो पकड़ कर शम्भुजी (राजसमंद का हत्यारा) ने जैसे उसको (अफ़राज़ुल) ख़त्म किया है, वैसे ही इसको ख़त्म कर दें। …इस बातचीत में लव-जेहाद के नाम पर विडियो पर हत्या करने वाले शम्भुलाल को “हीरो” (नायक), “बड़ी हस्ती” और ”क्रांतिकारी” क़रार दिया गया है। उसके लिए क़ानूनी लड़ाई लड़ने, मदद करने का भी सम्वाद है। “शम्भु जैसा बंदा हर घर में हो तभी हम अपने हिंदुत्व को बचा पाएँगे, राम का मंदिर बना पाएँगे।”यह सनसनीख़ेज़ बातचीत देश में कथित हिंदुत्व रक्षा के लिए छुपकर (“अंदर ही अंदर”) काम कर रहे संगठनों के बीच है। भोपाल का शख़्स हिंदू स्वाभिमान नामक संस्था चलाता है। महिला का नाम है, पर संगठन स्पष्ट नहीं। राजस्थान के कुछ लोगों और संगठनों के नाम भी इस टेप में आए हैं। सच्चे हैं या झूठे, पता नहीं। पर लगता है मानो सिरफिरे ‘हिंदुत्ववादी’ हत्यारों को संरक्षण देने की जमात पसरी हुई हो। पता नहीं “अंदर ही अंदर” – और कुछ चौड़े ही चौड़े – कितना ज़हर बह रहा है। सरकार भी उनकी। क्रांतिकारी भी उनके विचार को चमकाने वाले। किससे न्याय की उम्मीद रखें?

Om Thanviさんの投稿 2017年12月13日(水)

 

नोट- इस ऑडियो की अभी तक पुष्टि नहीं हो सकी है। यह ऑडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है।

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