गोदी मीडिया, बेशर्म मीडिया,बिकाऊ मीडिया या कह लीजिए दलाल मीडिया यह सारे रूप हैं भारतीय मीडिया के। भाजपा के वरिष्ठ नेता आडवाणी ने आपातकाल के बाद मीडिया को लेकर एक बयान दिया था

उन्होंने कहा था कि, मीडिया को झुकने के लिए बोला गया वह रेंगने लगी लेकिन अब इस वाक्य में लोग रेंगने की जगह चाटने से जोड़ रहे हैँ।
घुटने के बल बैठी मीडिया सत्ता के सामने इस कदर झुक गई है कि वह अंधी हो चुकी है। वह सत्ताधारी पार्टी के दफ्तरों के प्रेस विज्ञप्ति पर मोहताज हो चुकी है।

कल बाबरी मस्जिद के 25 साल पूरे हो रहे हैं। आज सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई को टाल दिया गया। अगली सुनवाई फरवरी 2018 में होगी।

इसपर मीडिया ने बेशर्मी भरे शो करने शुरू कर दिए। विपक्षी नेताओं को खासकर कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गाँधी को घेरना शुरू कर दिया।

जी मीडिया : ताल ठोक के बड़ा ही बेहूदा शो इस चैनल में चलाया जाता है। जो पूरी तरह सत्ता के लिए प्रायोजित है। सत्ता के दो-दो प्रवक्ता साथ में एंकर के रूप में एक प्रवक्ता मौजूद रहता है। शो का टाइटल सत्ताधारी पार्टी के दफ्तर से मंजूर होकर आता है।

‘जनेऊधारी राहुल’ श्रीराम मंदिर पर मौन क्यों ?

आजतक : क्या ‘शिवभक्त’ राहुल को राम मंदिर में रूकावट के लिए खेद नहीं है ?

न्यूज-18 : अबकी बार ‘अयोध्या विवाद’ का समाधान! 2019 से पहले राम मन्दिर?

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