भारतीय बैंकों की स्तिथि दिन-प्रतिदिन ख़राब होती जा रही है। पिछले तीन सालों में स्थिति ज़्यादा ख़राब हुई है। इस बात को अब मोदी सरकार ने भी मान लिया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की आर्थिक सलाहकार समिति के अध्यक्ष बिबेक देबरॉय ने कुअर्टज़ इंडिया के साथ बात करते हुए ये माना है।

पिछले तीन सालों में भारतीय बैंकों ने 6 लाख करोड़ रुपये राईट ऑफ़ किये हैं यानि कर्ज़ का वो पैसा जो डूब गया है। बिबेक देबरॉय ने कहा कि मेरे अनुमान से अभी लगभग 3 लाख करोड़ रुपये और डूबेंगे।

उन्होंने कहा कि भारतीय बैंकों ने जितना लोन दे रखा है उसका 30% कभी वापस नहीं आएगा।

गौरतलब है कि पिछले तीन सालों में भारतीय बैंकों का एनपीए (बैंकों का वो कर्ज़ जिसके वापस आने कि सम्भावना ना हो) 2.40 लाख करोड़ से बढ़कर लगभग 10 लाख करोड़ हो गया है।

विश्व में सबसे ज़्यादा एनपीए वाले 39 देशों में भारत 5वें नंबर पर आता है। बैंकों के एनपीए का इस तरह बढ़ना उद्योगपतियों द्वारा लोन ना चुकाना और बैंक घोटालों का नतीजा है। इन एनपीए में 70% से ज़्यादा हिस्सा उद्योगपतियों का ही है|

बता दें, कि पिछले पांच सालों में बैंक घोटाले बहुत ज़्यादा बढ़ गए हैं। 2012-13 से 2016-17 के दौरान देश में 8,670 बैंक घोटाले हो चुके हैं। जहाँ 2012-13 में बैंक घोटालों से बैंकों को सालाना 6300 करोड़ का नुकसान हो रहा था। वहीं अब 2016-17 में ये आकड़ा 17,600 करोड़ हो गया है।

 

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