एक तरफ भाजपा बात-बात पर देशभक्ति और सैनिकों की शहादत की बात करती है और दूसरी तरफ उसी की सरकार देश के सैनिकों के विरोध में कदम उठा रही है। मिल रही ख़बरों के मुताबिक मोदी सरकार ने नौसेना में शहीद सैनिकों के बच्चों को मिलने वाले पढ़ाई फंड में कटौती की है। नौसेना प्रमुख ने भी इसका विरोध किया है।

नौसेना प्रमुख सुनील लांबा ने रक्षामंत्री निर्मला सीतारमण को पत्र लिखकर गुज़ारिश की है कि देश के लिए जान गंवाने वाले जवानों के बच्चों को मिलने वाली शिक्षा प्रतिपूर्ति को कम करने का जो फैसला किया गया है उसको वापस ले लिया जाए। सुनील लांबा ने लिखा है कि उन लोगों ने देश के लिए जान गंवाई है, ऐसे में सरकार को उनके बच्चों को पढ़ाई के लिए मिलने वाला फंड कम नहीं करना चाहिए।

उन्होंने कहा कि अगर सरकार उनकी ये सिफारिश मान लेगी तो देश की जनता को लगेगा कि सरकार शहीदों के बलियान को याद रखती है और उनके परिवार का ख्याल रखती है।

क्या है मामला?

1971 युद्ध के बाद से तत्कालीन सरकार ने एक नया नियम पेश किया था। इस नियम के तहत अगर कोई जवान ड्यूटी के दौरान अपनी जान गंवाता, लापता या दिव्यांग हो जाता है, तो उसके बच्चों के स्कूल, हॉस्टल, ट्यूशन, किताब, कपड़ों आदि का खर्च सरकार उठाती थी।

हाल ही में मोदी सरकार ने नया फैसला लिया, जिसके बाद से अब ये खर्च 10 हज़ार तक सीमित हो गया है। सरकार का ये आदेश 1 जुलाई 2017 से लागू है। वहीं सरकार के इस आदेश से सैनिकों के 3400 बच्चें प्रभावित हुए हैं। अब नौसेना प्रमुख चाहते हैं कि सरकार पुरानी व्यवस्था को लागू कर दे ताकि जवानों के परिजनों को राहत मिले।

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