प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज गुजरात में भाषण के दौरान कहा 8 नवंबर को सरकार ब्लैक मनी मुक्त दिवस मनाएगी। ये वही दिन है जिस दिन नोटबंदी लागू करते हुए नरेंद्र मोदी ने भारतीय अर्थव्यवस्था की बर्बादी की पटकथा लिखी ।

अब तो आरबीआई तक के आंकड़े कहने लगे इससे कोई काला धन वापस नहीं आया, तो मोदी सरकार की ये जिद हास्यास्पद है। तमाम अलग-अलग रिपोर्ट के हवाले से पता चलता है कि नोटबंदी  कि वजह से विकास दर में भारी गिरावट आई, 15,00000 से ज्यादा लोग  बेरोजगार हो गए।

आर्थिक नुकसान के आलावा नोटबंदी के दौरान लाइन में लगकर जिन दर्जनों लोगों की जानें चली गई उसकी भरपाई तो कभी हो ही नहीं सकती लेकिन अपनी धुन में खोई  सरकार ना जाने किस उपलब्धि को मनाने के लिए 5 नवंबर को ब्लैक मनी मुक्त दिवस मनाने की बात कर रही है।

अगर असफलताओं का जश्न मनाना समझदारी है ,तो निश्चित तौर पर नरेंद्र मोदी को 8 नवंबर के दिन ब्लैक मनी मुक्त दिवस मनाना चाहिए।

एक ऐसी पहल जिससे काला धन रुका नहीं बल्कि अर्थव्यवस्था रुक गई ,अगर उसे उत्सव की तरह पेश किया जाएगा तो फिर असफलताओं के जश्न की एक नई प्रथा शुरू हो जाएगी।

मोदी अपने भाषण में कहते हैं कि उन्होंने 2,10,000 शेल कंपनियों पर ताला लगा दिया है। इनकी तकनीकियों में न उलझकर इस बात को जरुर समझा जा सकता है कि नोटबंदी की वजह से लघु उद्योग पूरी तरह से ठप पड़ गए ,जिनसे लाखों लोग बेरोजगार और करोड़ों लोग प्रभावित हुए।

उनकी आर्थिक बर्बादी का जश्न मनाना किसी सरकार की संवेदनहीनता की ही मिसाल हो सकती है।

ग़लती से अगर कोई आर्थिक निर्णय ले लिया गया, लेकिन जब हर तरह से साबित हो गया कि एक गलत कदम था फिर भी जिद पर अड़े रहना ही शायद नरेंद्र मोदी स्टाइल ऑफ गवर्नेंस है । जिसमें असफलता की भी ब्रांडिंग करके बेचा जा सकता है ।

नोटबंदी करने के पहले कहा गया कि लगभग 16 लाख  करोड़ की करेंसी में बमुश्किल 12 लाख करोड रुपए बैंक में जमा होंगे और चार लाख करोड़ रुपए का काला धन पकड़ा जाएगा । लेकिन आरबीआई की रिपोर्ट आते ही इस झूठे दावे की पोल खुल गई और 99% से ज्यादा बैंक नोट वापस जमा हो चुके थे ।

इतना ही काला धन पकड़ा गया था जितना कि आम दिनों में यानी कि कुछ करोड़ की बरामदगी के लिए हजारों करोड़ का नुकसान किया गया। साथ ही लोगों को मुसीबत में डाला गया ।

वैसे नरेंद्र मोदी इन बातों को अपने गृह राज्य गुजरात में बोल रहे थे और बड़े गर्व से प्रस्तुत कर रहे थे। ऐसा करने में वह कई बार सफल भी हुए हैं ।

अभी ज्यादा दिन नहीं हुए हैं जब यूपी के चुनाव में विकास की बेहतरीन ब्रांडिंग करके जीत दर्ज करने में भाजपा सफल हुई थी । हो सकता है कि गुजरात में भी यही हथकंडा अपनाते हुए सफलता पा जाएं ।

इस मामले में तो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी हिटलर से बेहद प्रभावित लगते हैं कि अगर किसी झूठ को झूठ को बार-बार सच की तरह प्रस्तुत किया जाए तो वह सभी को सच लगने लगता है, यहाँ तक कि खुद को भी ।

Loading...
loading...