कल प्रधानमंत्री मोदी ने जिस तरह से रोकर गौरक्षकों को और मुसलमानों की हत्या करने वाले अपने भक्तों को संबोधित किया। और दिखावे के आंसू बहाए, उससे कुछ भी नहीं बदलेगा।

मोदी जी को याद रखना चाहिए कि वह खुद मुसलमानों के खिलाफ फैलाई गई नफरत की पैदाइश हैं। उन्हें मुसलमानों के खिलाफ दंगा करने की इसी खासियत की वजह से चुना गया है।

यह नफरत राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ और भाजपा द्वारा लगातार जनता के दिमागों में भरी जा रही हैं। इस नफरत के खत्म होते ही भाजपा भी खत्म हो जाएगी, और मोदी जी भी कुर्सी से नीचे उतर जाएंगे।

अब भाजपा का नेता वही बन सकता है जो मोदी से भी ज्यादा नफरत भरी बातें करेगा, इसलिए अब लोग मोदी के मुकाबले योगी आदित्यनाथ को उनके लिए चुनौती मान रहे हैं।

आप भाषण क्या देते हैं वह बिल्कुल अलग बात है, लेकिन आप पुलिस को प्रशासन को और अपनी पूरी पार्टी को अपने कामों से जो संदेश देते हैं वह ज्यादा काम करता है।

मुजफ्फरनगर में दंगा करवाने वाले भाजपा के विधायकों संगीत सोम और सुरेश राणा को नरेंद्र मोदी और अमित शाह के मंच से सम्मानित किया गया, उससे क्या संदेश गया कि आप दंगा कराना पसंद करते हैं।

इसी तरह छत्तीसगढ़ में गुंडों को इकट्ठा करके मानव अधिकार कार्यकर्ताओं पर हमला करने वाले पुलिस अधिकारी कल्लूरी से आपने खासतौर पर जाकर हाथ मिलाया, इससे क्या संदेश गया ?

अब आप भले ही आंसू बहाकर कितना भी ढोंग कर ले उसका कोई असर होने वाला नहीं है। असर आपके कामों का होता है बातों का नहीं, अगर आप वाकई में हिंसा रोकना चाहते हैं तो वैसे कदम भी उठाइए।

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