संघ प्रमुख मोहन भागवत के दिए नए बयान पर हंगामा हो गया है। जिसमें उन्होंने कहा है कि “सेना को तैयार होने में 6-7 महीने लग जाएंगे, लेकिन हम दो से तीन दिन में ही तैयार हो जाएंगे, क्योंकि हमारा अनुशासन ही ऐसा है।”

इस बयान से बहस छिड गई है कि क्या मोहन भागवत को भारतीय सेना से ज्यादा खुद के स्वयं सेवको पर भरोसा है?

मोहन भागवत के बयान के जवाब में भारत मुक्ति मोर्चा के राष्ट्रीय अध्यक्ष वामन मेश्राम ने मोहन भागवत की z+ सुरक्षा को लेकर कहा कि “मोहन भागवत भारतीय सेना का अपमान कर रहे है।

उन्हे स्वयंसेवको पर इतना ही विश्वास है तो अपनी z+ सुरक्षा हटा देनी चाहिए। साथ ही संघ परिवार के जिन्होंने भी किसी भी प्रकार की सरकारी सुरक्षा ली है उसे तुरंत हटाकर स्वयंसेवको को भर्ती करना चाहिए। इससे सरकार का हो रहा नुकसान बचेगा।”

संघ की खूबी गिनाते हुए मोहन भागवत जाने अनजाने में भारतीय सेना से खुद को ज्यादा तत्पर बताया। उन्होंने अपने बयान से फिर से नए हंगामे को न्योता दे दिया है। भागवत का मानना है कि देश को अगर संघ की ज़रूरत महसूस होगी वो सेना से पहले देश के लिए खड़े रहेंगे।

बता दें कि इससे पहले भी मोहन भागवत बिहार विधानसभा चुनाव (2015) के दौरान ओबीसी आरक्षण पर फिर से विचार करने की अनुशंसा कर चुके हैं। भागवत इस बयान के बाद बीजेपी ने खुद को अलग कर लिया था।

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