उफान पर आई ब्रहमपुत्र नदी मानो पूरे असम को निगल जाने पर उतारू है। 24 जिलों के सैकड़ों गांवों के लगभग 15 लाख लोग बाढ़ से बुरी तरह प्रभावित हैं। जिसमें अभी तक 40 से ज्यादा मौतें हो चुकी हैं। लेकिन गोदी मीडिया की असली लड़ाई लालू और तेजस्वी से है, पूरा का पूरा जमावड़ा दिन-रात वहीं मेहनत कर रहा है।

असम में इस भारी बाढ़  से न सिर्फ लाखों लोग बेघर हुए हैं बल्कि 5 लाख से ज्यादा पशु भी प्रभावित हुए हैं ।

इस आपदा की ओर केंद्र सरकार की नजरअंदाजी का आलम यह है कि, वहां से स्थानीय नेता बार-बार पत्र लिख रहे हैं लेकिन केंद्र ऐसे सोई हुई है जैसे कि असम इस देश का हिस्सा ही नहीं है।

इस मामले पर असम के कलियाबोर से सांसद गौरव गोगोई ने केंद्र सरकार को खत भी लिखा है। जिसमें मांग किया है कि बाढ़ से प्रभावित असम को भारी राहत पैकेज और तमाम सुविधाएं उपलब्ध कराई जाए। साथ ही ब्रम्हपुत्र नदी की इस भयानक त्रासदी को नियंत्रित करने के लिए कोई स्थाई योजना बनाई जाए।

उन्होंने केंद्र से मांग की है कि 5000 करोड़ रुपए का विशेष बजट दे ताकि इस मामले का स्थाई समाधान किया जा सके।

सरकार की नजरअंदाजी से नाराज होते हुए गौरव गोगोई कहते हैं भाजपा के वो मंत्री कहां चले गए जो ‘नमामि ब्रह्मपुत्र’ का जश्न मनाने यहां आए थे। अब जब यही ब्रह्मपुत्र पूरे असम को निगल रही है तो इस त्रासदी के दौर में तमाम नेता कहां है।

इस मामले पर दुख व्यक्त करते हुए विपक्ष की ओर से राष्ट्रपति पद की उम्मीदवार मीरा कुमार कहती हैं ‘असम बाढ़ से प्रभावित लोगों को जिन परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है उसे जानकर बहुत दुख हुआ। मैं भारत सरकार से निवेदन करती हूं की बाढ़ प्रभावित असम के लोगों के लिए हर संभव मदद करें।’

Loading...
loading...