नई दिल्ली। जेएनयू के लापता छात्र नजीब अहमद का नाम आतंकवाद से जोड़े जाने पर प्रतिक्रियाओं का दौर शुरु हो गया है। वरिष्ठ पत्रकार एवं लेखक राणा अय्यूब के बाद अब जेएनयू छात्रसंघ की पूर्व उपाध्यक्ष और आईसा कार्यकर्ता शहला राशिद ने इसे शर्मनाक बताया है।

शहला ने मंगलवार को लगातार ट्वीट कर अंग्रेज़ी डेली टाइम्स ऑफ इंडिया (TOI) की उस खबर की जमकर आलोचना की जिसमें नजीब का नाम आतंकी संगठन आईएसआईएस से जोड़ा गया है। उन्होंने कहा कि TOI को फर्जी खबर प्रकाशित करने के लिए शर्म करनी चाहिए।

शहला ने कहा कि दिल्ली पुलिस ने TOI की खबर से कन्नी काट ली है, क्या TOI नजीब को बदनाम किए जाने के लिए माफी मांगेगा? आरएसएस की छात्र शाखा एबीवीपी पर निशाना साधते हुए शहला ने कहा कि नजीब एक पीड़ित है, आतंकवादी तो वह हैं जिन्होंने उसे प्रताड़ित किया है।

असीमानंद, साध्वी प्रज्ञा और इंद्रेश कुमार का ज़िक्र करते हुए शहला ने कहा कि TOI इन नामों को छोड़कर नजीब को आतंकवादी साबित करने में लगी है। उन्होंने कहा कि भारत में यह कितना आसान है कि किसी बेगुनाह मुसलमान को आतंकवादी कह दिया जाए।

बता दें कि दिल्ली पुलिस ने नजीब से संबंधित एक रिपोर्ट दिल्ली हाई कोर्ट को सौंपी है, जिसमें कहा गया है कि नजीब के लैपटॉप की ब्राउसिंग हिस्ट्री से पता चला है कि वह इस्लामिक स्टेट के बारे में जानकारियां इकट्ठा कर रहा था।

हालांकि बाद में दिल्ली पुलिस के मुख्य प्रवक्ता दीपेन्द्र पाठक ने रिपोर्ट को ग़लत बताते हुए कहा कि नजीब अहमद केस में जांच के दौरान आतंकी संगठन इस्लामिक स्टेट से किसी प्रकार के जुड़ाव की जानकारी नहीं सामने आई है।

ग़ौरतलब है कि दिल्ली पुलिस को दिल्ली हाईकोर्ट ने इस मामले की सुनवाई करते हुए फटकार लगाई थी। कोर्ट ने कहा था कि दिल्ली पुलिस केवल पेपर वर्क पर ध्यान दे रही है और जनता का पैसा बर्बाद कर रही है।

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