अगर आपने मालेगाँव के आरोपियों को न छोड़ा होता,

अगर आपने सहारनपुर में दलितों पर हिंसा करने वालों को सजा दी होती,

अगर ऊना, दादरी, जुनैद, पहलू खान के मामले आपके कानून व्यवस्था को लागू करने के मॉडल बने होते,

अगर कोई मुख्यमंत्री पूरी न्यायिक प्रक्रिया का मजाक उड़ाते हुए खुद से और मुज़फ़्फ़रनगर के दंगाइयों से केस वापस नहीं लेता,

अगर आपके मंत्री जाकर हत्यारों को राष्ट्रभक्त होने का तमगा नहीं देते,

अगर गौरी, दाभोलकर, पांसारे, कलबुर्गी के हत्यारे जेल में होते

तो ये करनी सेना के गुंडों की कुछ भी करने की हिम्मत नहीं होती.

मोदी जी आप दावोस में जाकर तो आतंक से लड़ने का दावा ठोंकते हो, लेकिन आपने देश में एक नया तरीके का आतंक पैदा होने दिया है,

जिसने सरकारी संरक्षण में कानून और व्यवस्था की खिल्ली उड़ायी है.

कानून व्यवस्था में Pick एंड Choose नहीं होता.

आपने करनी सेना जैसे संगठनों को अपने साथी के रूप में choose किया था, आज यही लोग आम नागरिक जीवन को अस्त- व्यस्त किए बैठे हैं.

– मोहित पाण्डेय

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