गाँधीनगर में मोदी भाजपा के कार्यकर्ताओं को सम्बोधित कर रहे थे। यह कोई जनसभा नहीं थी। फिर भी जीएसटी के पैसे से चलने वाले दूरदर्शन ने इसे लाइव दिखाया।

इतना ही नहीं, (चुनावी) भाषण के बाद दूरदर्शन के स्टूडियो में भाषण पर चर्चा (पढ़ें व्याख्या) के लिए सिर्फ़ एक “विशेषज्ञ” हाज़िर थे – राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के अख़बार ऑर्गनाइज़र के सम्पादक।

संघ के सर संघचालक मोहन भागवत के नागपुर से लाइव प्रसारण से लेकर भाजपा की सभा के आज के प्रसारण तक “स्वायत्त” लोकसेवा प्रसारण संगठन प्रसार भारती का पतन मीडिया संसार में चिंता का सबब होना चाहिए।

आकाशवाणी-दूरदर्शन का राजनीतिक दुरुपयोग इंदिरा गांधी के ज़माने से होता आ रहा है। पर नागपुर में कैमरा, गाँधीनगर में कैमरे और स्टूडियो में ऑर्गनाइज़र को बिठाल कर इस सरकार ने तो दिखावे की मर्यादा भी नहीं रखी है।

ओम थानवी, वरिष्ठ पत्रकार (पूर्व जनसत्ता के संपादक)

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