बैंक से लोन लेने या बड़ी संख्या में रकम निकालने के लिए अब आपको ओरिजिनल आईडी प्रूफ देना होगा। क्योंकि सरकार ने बैंकों और वित्तीय संस्थानों के लिए एक समय सीमा तय कर दी है। तय समय सीमा के अनुसार बैंक से बड़ी रकम निकालने और लोन लेने के लिए अब आपको पहचान पत्र की फोटो कॉपी के साथ-साथ ओरिजिनल आईडी प्रूफ भी बैंक को दिखाना होगा।

सरकार ने ये इसलिए किया है जिससे जाली या धोखाधड़ी करके बनाए गए डॉक्यूमेंटों को पता चल सके और इस पर रोक लगाई जा सके।

वहीं अब वित्त मंत्रालय के अनुसार राजस्व विभाग ने गजट अधिसूचना जारी कर दिया है जिसमें मनी लॉन्ड्रिंग रोधक के नियमों में संशोधन किया गया है। इस नए नियम के अनुसार जो ग्राहकों बैंक से बड़ी रकम का लेन देन करेगा उसको अपनी पहचान बताने के लिए फोटो कॉपी के साथ-साथ ओरिजिनल आईडी भी देनी पड़ेगी।

लेकिन अब मनी लॉन्ड्रिंग रोधक कानून यानि पी.एम.एल.ए ने देश में मनी लॉन्ड्रिंग और काले धन पर रोक लगाने का कानून रूप है। इसके नियमों के अनुसार बैंकों, वित्तीय संस्थानों और अन्य के लिए ग्राहक को अपनी पहचान के लिए आईडी देनी होगी और रिकॉर्ड के लिए भारत की वित्तीय खुफिया इकाई को सूचना जरूर देनी होगी।

वहीं 50 हजार रुपये से अधिक के लेनदेन पर आधारकार्ड नंबर या अन्य आईडी प्रूफ लगाना जरूरी है। और अगर कोई 10 लाख रुपये से अधिक नकद निकालता है या उस पैसे को विदेशी रुपये में लेनदेन करता है तो उसके लिए भी आधारकार्ड या अन्य आईडी प्रूफ लगाया जा सकता है। इतना नहीं पी.एम.एल.ए के नियम 9 के अनुसार शेयर ब्रोकर, चिट फंड कंपनियां, सहकारी बैंक, आवास वित्त संस्थान और गैर बैंकिंग वित्तीय कंपनियों को भी अलग-अलग बांटा गया है।

बता दें कि गजट अधिसूचना में कहा गया है कि अगर कोई आधिकारिक रूप से दिए गए वैध दस्तावेज में नया पता शामिल नहीं है तो बिजली, टेलीफोन बिल, पोस्ट पेड मोबाइल बिल या बिजली का बिल पते के प्रमाण के रूप में दे सकता है। लेकिन जो भी बिल होंगे वह दो महीने से अधिक पुराने ना हो इस बात के लिए खास ध्यान ऱखा जाए।

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