पाकिस्तान भी भारत जैसा ही एक देश है,

पाकिस्तान में भी भारत जैसे ही देशभक्त लोग रहते हैं,

पाकिस्तान में भी भारत की तरह कुछ लोग साम्प्रदायिकता फैलाते हैं,

पाकिस्तान में भी भारत की तरह कुछ सेक्युलर लोग होते हैं,

पाकिस्तान में भी भारत की तरह सेक्युलर लोगों को देशद्रोही कहा जाता है,

जैसे भारत में हिन्दुत्व साम्प्रदायिकता का विरोध करने वालों को पाकिस्तानी एजेंट कहा जाता है,

वैसे ही पाकिस्तान में भी मुस्लिम साम्प्रदायिकता का विरोध करने वालों को भारतीय एजेंट कहा जाता है,

जैसे भारतीय फिल्मों में आतंकवादी पाकिस्तानी होते हैं,

वैसे ही पाकिस्तानी फिल्मों में आतंकवादी भारतीय होते हैं,

जैसे भारत में गाना है कि ‘आओ बच्चों तुम्हें दिखायें झांकी हिन्दुस्तान की, इस मिट्टी से तिलक करो ये धरती है बलिदान की,

ठीक वैसा ही पाकिस्तान में भी गाना है कि ‘ आओ बच्चों सैर करायें तुम को पाकिस्तान की, इसकी खातिर हमने दी कुर्बानी लाखों जान की,

जैसे आपके यहां गाना बना कि ‘ दे दी हमें आज़ादी बिना खड़ग बिना ढ़ाल,
साबरमती के संत तूने कर दिया कमाल, ‘

ठीक वैसा ही गाना पाकिस्तान में बना कि ‘यूं दी हमें आज़ादी कि दुनिया हुई हैरान, ऐ कायदे आज़म तेरा अहसान है अहसान, ‘

दोनों देश एक जैसे हैं,

अब ज़रूरत है कि भारत पाकिस्तान और बंगलादेश के युवा मिलकर अपने देश की जनता की गरदनों पर बैठे पूंजीपतियों, धार्मिक कट्टरपंथियों और भ्रष्ट नेताओं के विरुद्ध मिलकर आन्दोलन करें,

मेहनत करने वाले गरीब मेहनतकश, मज़दूर किसान और कारीगरों की ताकत बढ़े,

तीनों मुल्कों के नौजवान दुश्मनों की तरह नहीं दोस्तों की तरह सोचें,

इसके अलावा अफगानिस्तान, भूटान बर्मा और श्रीलंका के साथ मिलकर दक्षिण एशिया के नागरिकों का साझा आन्दोलन खड़ा होना चाहिये,

जो जातिवाद, धार्मिक कट्टरता, गरीबी और पूंजीवाद के खिलाफ हो,

कट्टरपंथियों को अपनी जिंदगी और अपने इलाके को बर्बाद मत करने दीजिये,

नफरत में मज़ा नहीं है,

प्यार में मज़ा है

इससे पहले कि नफरत के सौदागर युद्ध और घृणा से हमारी जिंदगी बर्बाद कर दें,

अभी वख्त है जागने का

लेखक- हिमांशु कुमार (सामाजिक कार्यकर्ता)

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