प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और भाजपा अध्यक्ष अमित शाह का गृहराज्य गुजरात इस समय बाढ़ की भयंकर विभीषिका झेल रहा है। ऐसे हालात में राज्य की सत्ताधारी पार्टी भाजपा राज्य की जनता को भूल कर विपक्षी नेताओं को तोड़ने में लगी है। तो वहीं कांग्रेस अपने विधायकों को पाला बदलने से रोकने की जद्दोजहद कर रही है।

राजनीति का स्तर इतना गिर चुका है कि जिस राज्य से देश के प्रधानमंत्री आते हैं, सत्ताधारी पार्टी का मुखिया और सबसे ताकतवर नेता आता है वहां जनता में हाहाकार मचा हुआ है। और जनता के इस दुख-दर्द को जिन्हें सुनना था वो विधायकों के खिंचतान में लगे हैं।

सरकारी आंकड़ों के हिसाब से राज्य में आई बाढ़ ने अब तक 80 से ज्यादा लोगों को लील लिया है। हजारों लोग राज्य के दूर दराज के इलाकों में बाढ़ के बीच फंसे हुए हैं। लाखों लोग बेघर हो चुके हैं। बाढ़ और भारी बारिश की वजह से राज्य में अब तक 1000 से ज्यादा जानवरों की मौत हो चुकी है। सबसे ज्यादा बनासकांठा, साबरकांठा, पाटन और मेहसाणा जिले प्रभावित हैं।

लेकिन जब इस बुरे वक्त में राज्य के लोगों को सरकार और नेताओं की सबसे ज्यादा जरुरत है तो समय भाजपा विपक्षी दलों में सेंधमारी में लगी हुई है। बिहार में महागठबंधन की सरकार गिराकर अपने गठबंधन में सरकार बनवा लेने के बाद भाजपा ने गुजरात कांग्रेस के 6 विधायकों को अपने पाले में कर लिया।

यह सारी कवायद सिर्फ राज्यसभा की एक सीट के लिए की जा रही है। सोनिया गांधी के राजनीतिक सचिव अहमद पटेल को राज्यसभा जाने से रोकने के लिए भाजपा साम दाम दंड भेद के तर्ज पर हर हथकंडे अपना रही है। भाजपा के इस हमले से बचने के लिए कांग्रेस ने अपने 44 विधायकों को कर्नाटक भेज दिया है।

देश में चुनाव तो होते रहते हैं। कोई जीतता है तो कोई हारता है। लेकिन ये कैसी जिद कि विपक्ष को नेस्तनाबूद करने के लिए उसी जनता की तिलांजलि दे दी जाए जो उन्हें चुनती है। चुनाव अपने समय पर होंगे और उनका परिणाम भी आ जाएगा।

लेकिन फिलहाल इन सब के बीच अगर कोई पीस रहा है तो वह गुजरात की जनता। इतने भयंकर हालात में उसकी सुनने वाला कोई नहीं है। भाजपा ने मानो राज्य की जनता को राम भरोसे ही छोड़ दिया है।

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