सोशल मीडिया पर वर्तमान में अपने काम के आधार पर ख्याति पाने वाले लोगों के ऊपर ट्रेंड चला। यह ट्रेंड व्यंग्यात्मक शैली में है।

पुरानी कहावत है ‘जैसा काम वैसा नाम’। मतलब जो जैसा काम करता है उसके आसपास के लोग उसे काम के अनुसार नाम की उपाधि देकर बुलाने लगते हैं।

अम्बेडकर ‘संविधान निर्माता’, महात्मा गाँधी ‘बापू’, एपीजे अब्दुल कलाम ‘मिसाइल मैंन’। ऐसे ही अपने काम से अपना नाम कमाने वालों की फेहरिस्त बहुत लंबी है।

गुरुवार को सोशल मीडिया पर वर्तमान में अपने काम के आधार पर ख्याति पाने वाले लोगों के ऊपर ट्रेंड चला। यह ट्रेंड व्यंग्यात्मक शैली में है।

कई यूजर्स ने लिखा “मैं पत्रकार लिखूंगा तुम रवीश कुमार समझ लेना, मैं किसान लिखूंगा तुम मंदसौर समझ लेना, मैं बुलेट ट्रेन लिखूंगा तुम दुर्घटना समझ लेना, मैं चूना लगाना लिखूंगा तुम मोदी समझ लेना”।

गौरतलब है कि जिस तरह से गौरी लंकेश, कलबुर्गी, पनसारे को चिन्हित करके मारा गया उसी के समान्तर वरिष्ट पत्रकार रवीश कुमार बेबाक होकर बोलते रहे हैं। रवीश के साथ में एक-दो पत्रकार और हैं जो सत्ता के खिलाफ अपनी आवाज जनता तक पहुँचा रहे हैं। ऐसे में पत्रकार सत्ता पक्ष के कट्टरपंथियों के निशाने पर हैं।

आपको बता दें कि, मोदी सरकार अपने आपको किसान हितैषी कहती आई है, लेकिन मध्य प्रदेश के मंदसौर में बेकसूर किसानों पर गोली चलवा देती है जिसमें 6 किसानों की मौत हो गई थी।

इसी तरह प्रधानमंत्री मोदी ने वादा किया था कि देश से भ्रष्टाचार खत्म करके, देश के हर एक नागरिक के अकाउंट में 15 लाख रुपए जमा करवाएंगे। लेकिन उन्होंने अपना एक भी वादा पूरा नहीं किया, इसीलिए जनता ने उन्हें लोगों को चूना लगाने वाला कहा।

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