‘जैसा देश वैसा भेष’ यह कहावत प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी पर सटीक बैठती है। प्रधानमंत्री का व्यक्तित्व ही ऐसा है कि वो जहाँ जाते हैं उसे हक से अपनी जननी बता देते हैं। फिर वो चाहे संबंधित जगह की वेशभूषा हो या वहां जाकर यह कहना कि मैं यहाँ का ‘बेटा’ हूँ।

हम सबको याद है कि 2014 में वाराणसी की एक रैली में उन्होंने कहा था “मैं माँ गंगा का बेटा हूँ” और आज की भुज की रैली में पीएम ने कहा कि वो “गुजरात का बेटा हैं”।

प्रधानमंत्री ने गंगा को माँ तो बोला लेकिन आज भी गंगा जस की तस है, रोज़ लाखों लीटर फैक्ट्रियों का गंदा पानी गंगा के अविरल पानी में गिरता है जिससे पानी की गुणवत्ता खतरनाक स्तर से कहीं गुना अधिक है।

गंगा में गंदगी का अम्बार है। लेकिन पीएम मोदी ‘नमामि गंगे’ मंत्रालय बनाकर भी गंगा को स्वच्छ बनाने में विफल साबित हुए हैं।

गुजरात मॉडल प्रोजेक्ट करके प्रधानमंत्री मोदी ने उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र, हरियाणा, उत्तराखंड, असम में सैकड़ों रैलियां कर चुके हैं। लेकिन यह हैरान करने वाली बात है कि पीएम खुद गुजरात में ही विकास की बात नहीं कर रहे। बल्कि रैली में भावनात्मक बयान देकर मुख्य मुद्दों से जनता को बरगलाने का काम कर रहे हैं।

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