प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी गुजरात की धरती पर चुनावी रैलियां करने में व्यस्त है। खुद को सेवक, चौकीदार और जनता का ख्याल रखने वाले प्रधानमंत्री कुछ भी कहने से या निंदा करने से बचते क्यों है ?

राजस्थान के राजसमंद में इंसानियत को शर्मसार कर देने वाले मामलें पर अब तक कुछ नहीं बोला है। छोटी-छोटी बातों पर ट्वीट करने वाले  पीएम मोदी पर गुजरात की सत्ता हासिल करने का जुनून सवार है कि, वो एक बार किसी ख़बर कुछ बोलना ही नहीं चाहते है।

मोहम्मद अफराजुल उर्फ मोहम्मद भुट्टा शेख का हत्या का जब वीडियो वायरल हुआ तो सड़क से लेकर सोशल मीडिया पर हंगामा मच गया। आम से लेकर खास सभी इस क्रूरता पर अपना गुस्सा ज़ाहिर करने लगे मगर जिनकी प्रतिकिर्या इंतजार किया जा रहा था वो थे प्रधानमंत्री मोदी।

जो आमतौर ऐसी किसी घटना से खुद को दूर रखते है यहां तक कभी ज़िक्र भी नहीं करते। मगर वहीँ अगर कांग्रेस का नेता उनपर कुछ गलत बोल जाते है तो उसका ज़िक्र वो फ़ौरन अपने भाषण में कर देते है। वजह साफ़ होती है जनता के मन में विपक्ष को गिरना अपना वोट बैंक मजबूत करते रहना।

अख़लाक़ से लेकर जुनैद और अब मोहम्मद अफराजुल पर मौन पीएम मोदी

ये पहली बार नहीं है जब पीएम मोदी ऐसे मामलों से खुद को दूर रखते है। उनके लिए खुद को चौकीदार कहना सिर्फ भाषण का हिस्सा है।

बीफ पर शुरू हुई नफ़रत की राजनीति में जब दादरी के अख़लाक़ की हत्या हुई तब वो शांत थे।

अब राजस्थान में उनकी सरकार है फिर भी वो कुछ भी बोलने से बच रहे है। ऐसा सिर्फ वोट बैंक के लिए अगर वो कुछ बोलते है तो चुनाव में मतदान पर इसका असर पड़ेगा ऐसे ही गुजरात में इस बार बीजेपी की राह इनती आसन नहीं है,उसपर से वो कुछ भी बोलकर बना बनाया खेल नहीं बिगाड़ना चाहते होंगे।

उम्मीद यह है कि, पीएम मोदी अगर ट्वीट कर देंगे तो भारत को बचाया जा सकता है वरना तो न्यू इंडिया की कल्पना अगर लव जिहाद से होती है तो इससे बुरा कुछ नहीं हो सकता है।

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