एक तरफ देश भूख, बेरोजगारी कर्ज़ और गरीबी जैसे बेहद गंभीर समस्याओं में उलझा हुआ है दूसरी तरफ योग दिवस मनाने के लिए करोड़ों रुपए उड़ाए जा रहे हैं । इसी पर एक कवि राजेश चंद्र ने कुछ मार्मिक पंक्तियां लिखी हैं।

भूख लगी है? योगा कर!

काम चाहिये? योगा कर!

क़र्ज़ बहुत है? योगा कर!

रोता क्यों है? योगा कर!

अनब्याही बेटी बैठी है?

घर में दरिद्रता पैठी है?

तेल नहीं है? नमक नहीं है?

दाल नहीं है? योगा कर!

दुर्दिन के बादल छाये हैं?

पन्द्रह लाख नहीं आये हैं?

जुमलों की बत्ती बनवा ले

डाल कान में! योगा कर!

किरकिट का बदला लेना है?

चीन-पाक को धो देना है?

गोमाता-भारतमाता का

जैकारा ले! योगा कर!

हर हर मोदी घर घर मोदी?

बैठा है अम्बानी गोदी?

बेच रहा है देश धड़ल्ले?

तेरा क्या बे? योगा कर!

  • राजेश चन्द्र

दरअसल, इन काव्यात्मक पंक्तियों को आम आदमी पार्टी के प्रवक्ता संजय सिंह ने अपने ट्विटर हैंडल पर साझा करते लिखा ‘भूख लगी है योगा कर, काम चाहिए योगा कर, क़र्ज़ बहुत है योगा कर।

Loading...
loading...