प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना को मोदी सरकार की सबसे बड़ी कामयाब योजना बताई जा रही है। खुद पीएम मोदी इस योजना का ज़िक्र कई बार अपने भाषणों और इंटरव्यू के दौरान कर चुके हैं।

सड़कों पर भी इस योजना के पोस्टर आपको पीएम मोदी के साथ लगे दिखेगें। लेकिन क्या ये योजना इतनी ही कामयाब हुई है जितनी बताई जा रही है या फिर एक तरफ़ा आकड़े दिखाकर गुमराह किया जा रहा है।

क्या है योजना

उज्ज्वला योजना के अंतर्गत भारत सरकार एलपीजी कनेक्शन उपलब्ध कराएगी। एलपीजी कनेक्शन केवल गरीबी रेखा से नीचे के परिवारों से सम्बंधित महिलाओं को दिया जाएगा। इस योजना को मई 2016 में शुरू किया गया था। योजना के अंतर्गत 5 करोड़ घरों को मुफ्त गैस कनेक्शन दिया जाएगा।

वर्तमान में उपयोग में आने वाले अशुद्ध जीवाश्म ईंधन के उपयोग को कम करना और शुद्ध ईंधन के उपयोग को बढाकर प्रदुषण में कमी लाना भी योजना का प्रमुख उद्देश्य है।

कहाँ चूक गई मोदी सरकार

अभी तक 3 करोड़ घरों को कनेक्शन दिये जा चुके हैं। लेकिन फिर भी उद्देश्य पूरा होता नहीं नज़र आ रहा है। दरअसल, योजना के लागू होने के बाद गैस कनेक्शन तो बढ़े हैं लेकिन गैस का उपयोग करने वालों की संख्या उस तेज़ी से नहीं बढ़ रही है। इसका कारण है हर योजना को लागू करने में मोदी सरकार की जल्दबाज़ी।

योजना लागू करने से पहले सरकार ने CRISIL कंपनी से एक सर्वे करने के लिए कहा था जिसमें ये पता लगाना था कि क्यों आज भी लोग गैस की जगह अशुद्ध जीवाश्म ईंधन का उपयोग क्यों करते हैं। लेकिन इसकी रिपोर्ट आने से एक महीने पहले ही योजना को शुरू कर दिया गया।

अब आकड़े देखे तो गैस कनेक्शन 16.23% की दर से बढ़ रहे हैं लेकिन गैस सिलेंडर का उपयोग 9.83% की दर से बढ़ रहा है जो 2014-15 की दर से भी कम है। जबकि तब ये योजना शुरू भी नहीं हुई थी। मतलब कनेक्शन तो लिया जा रहा है लेकिन गैस सिलेंडर का उपयोग नहीं हो रहा है।

इसका कारण CRISIL की रिपोर्ट में छुपा है। ये रिपोर्ट 13राज्यों के 120 ज़िलों के आधार पर बनाई गई थी।

सर्वे में 86% लोगों ने कहा कि गैस कनेक्शन बहुत महंगा है इसलिए वो इसका प्रयोग नहीं करते। 83% ने कहा कि सिलेंडर बहुत महंगा है। सिलेंडर मिलने के लिए लम्बे इंतेज़ार को भी एक कारण बताया गया। ग्राम पंचायत के सर्वे बताते हैं कि सिलेंडर के लिए लोगों को 15 दिन तक इन्तेज़ार करना पड़ता है।

लेकिन सरकार ने कनेक्शन वाली समस्या को छोड़ अन्य किसी पर ध्यान नहीं दिया है। बल्कि सिलेंडर पहले के मुकाबले और ज़्यादा महंगा कर दिया गया है और जल्दी सिलेंडर डिलीवरी की समस्या पर कोई ध्यान ही नहीं दिया गया है। लोग फ्री कनेक्शन तो ले रहे हैं लेकिन पहले सिलेंडर के बाद दूसरा सिलेंडर नहीं मंगा रहे हैं।

कैग की एक रिपोर्ट के मुताबिक,  उज्ज्वला योजना शुरू होने से पहले गैस कनेक्शन वाले घरों में 6.27 की दर से सिलेंडर का उपयोग हो रहा था लेकिन अब उपयोग घटकर 5.6 रह गया है।

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