भारतीय प्रेस पर हिंदुत्ववादी कट्टरपंथियों वाली सोच हावी होती जा रही है। ऐसा कहना है मीडिया और पत्रकारों की आज़ादी पर निगरानी करने वाली अंतरराष्ट्रीय संस्था रिपोर्टर्स विदाउट बॉर्डर्स का।

जिन्होंने भारत को प्रेस रैंकिंग में 136वां स्थान दिया है जोकि पिछले साल 133 थी। रैंकिंग जारी करते हुए जो बातें कही गयी वो वो चिंता करने वाली है।

संस्था ने भारत के बारे में Threat from Modi’s nationalism हैडिंग देते हुए लिखा है हिंदुत्ववादी कट्टरपंथियों द्वारा बहस के जरिये देशप्रेम के मानक तय करने की कोशिश के कारण मुख्यधारा के मीडिया में सेल्फ-सेंसरशिप की बढ़ती जा रही है।

पत्रकारों को जान से मार देना और उन्हें धमकी देना आम हो चला है। कई बार कश्मीर में रिपोर्टिंग करते वक़्त कई पत्रकार हिंसा का शिकार हो जाते है। बात बात पर इन्टरनेट बंद कर देना प्रदर्शन करने वालें को रोकना

रिपोर्ट में मोदी सरकार के आने बाद ज़िक्र खासा जोर देते हुए कहा गया है कि 2014 में नरेंद्र मोदी के प्रधानमंत्री बनने के बाद हिंदुत्ववादी राष्ट्रवादियों ने पत्रकारों लगातार धमकी मिल रही है। शांतनु भौमिक और गौरी लंकेश की हत्या का ज़िक्र करते हुए रिपोर्ट में कहा गया है कि धमकी तब सच हो जाती है जब पत्रकार मार दिए जाते है।

रिपोर्ट कहती है सरकार का मीडिया को कण्ट्रोल करने की मंशा साफ़ दिखाई पड़ती। क्योकिं जब एनडीटीवी के मालिकों घर छापा पड़ा था तब पत्रकार यही मांग कर रहे थे कि उन्हे प्रेस की आज़ादी चाहिए। जिसका समर्थन कई पत्रकारों ने प्रेस क्लब में एक साथ मिलकर किया था।

प्रेस की आज़ादी के मामले में 180 देशों में भारत 136 वें स्थान पर है। ये पहली बार नहीं है जब इस संस्था ने मोदी सरकार पर प्रेस की आज़ादी पर जमकर हमला किया हो इससे पहले मोदी का

संस्था की ओर से प्रकाशित हालिया रपट में केंद्र सरकार से लोकतंत्र की मजबूती और कानून का राज कायम करने के लिए मीडिया को सशक्त बनाने और पत्रकारों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की अपील की गई है।

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