भारत छोड़ो आंदोलन के 75वीं वर्षगांठ के मौके पर संसद में विशेष सत्र का आयोजन किया गया। इस अवसर पर प्रधानमंत्री मोदी के बाद बोलने उठी सोनिया गाँधी ने संघ पर तंज कसते हुए कहा कि कुछ लोग ऐसे भी थे जिन्होंने भारत छोड़ो आंदोलन का विरोध किया।

सोनिया ने कहा कि, मैं सभी महिला पुरुष कार्यकर्ताओं को श्रद्धांजलि देती हूं जिन्होंने देश की आजादी में योगदान दिया। सोनिया गांधी ने स्वाधीनता आंदोलन में कांग्रेस कार्यकर्ताओं के योगदान का भी जिक्र अपने संबोधन में किया।

सदन में बोलते हुए सोनिया गाँधी ने कहा कि आज जब हम उन शहीदों को नमन कर रहे हैं, जो स्वतंत्रता संग्राम में सबसे अगली कतार में रहे, तब हमें नहीं भूलना चाहिए कि उस दौर में कुछ ऐसे संगठन और व्यक्ति भी थे। जिन्होंने भारत छोड़ो आंदोलन का विरोध किया था इन तत्वों का हमारे देश को आजादी दिलाने में कोई योगदना नहीं रहा है।

जिस वक्त कांग्रेस अध्‍यक्ष संघ पर हमला कर रहीं थीं उस वक्त उनकी बातों को पीएम मोदी गौर से सुन रहे थे।

महात्मा गाँधी का ज़िक्र करते हुए सोनिया ने कहा कि गांधी जी सांप्रादायिकता के खिलाफ थे। अंधकार की शक्तियां हमारे बीच फिर से उभर रही है। जहां आजादी का माहौल था वहां भय फैल रहा है। आज फिर नफरत की राजनीति हावी हो रही है।

सोनिया गाँधी ने कहा कि आज हम भारत छोड़ो आंदोलन की यादों को ताज़ा कर रहे है। उन्होंने देश के पहले प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरु को याद करते हुए कहा कि पंडित नेहरु ने सबसे लम्बे समय तक जेल में रहे और भारत को आजाद करना में अहम भूमिका अदा की है।

क्या जनतंत्र को नुकसान पहुंचाने की कोशिश नहीं हो रही है?

सोनिया गांधी ने ताज़ा हालातों पर सवाल करते हुए पूछा कि क्या जनतंत्र को नुकसान पहुंचाने की कोशिश नहीं हो रही है? भारत छोड़ो आंदोलन की सालगिरह याद दिलाता है कि मानसिकता और संप्रदायवाद का कैदी बनने नहीं दे सकते हैं।

ऐसा लगता है कि उदारवादी मूल्य खतरे में पड़ रहे हैं, कई बार कानून के राज पर भई गैरकानूनी शक्तियां हावी दिखाई देती हैं।

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