राफेल डील पर मोदी सरकार फँसती जा रही है। सरकार पर डील में भ्रष्टाचार और उद्योगपति अनिल अम्बानी को फायदा पहुंचाने के आरोप लगे हैं। इन आरोपों पर जब विपक्ष ने सरकार से इस डील की जानकारी मांगी तो रक्षा मंत्री निर्मला सीतारमन ने कहा कि सीक्रेट पैक्ट के कारण सरकार जानकारी नहीं दे सकती है जबकि दो महीने पहले उन्होंने जानकारी साझा करने का वादा किया था।

राफेल एक लड़ाकू विमान है। इस विमान को भारत फ्रांस से खरीद रहा है। कांग्रेस ने मोदी सरकार पर आरोप लगाया है कि मोदी सरकार ने विमान महंगी कीमत पर खरीदा है जबकि सरकार का कहना है कि यही सही कीमत है। ये भी आरोप लगाया जा रहा है कि इस डील में सरकार ने उद्योगपति अनिल अम्बानी को फायदा पहुँचाया है।

बता दें, कि इस डील की शुरुआत यूपीए शासनकाल में हुई थी। कांग्रेस का कहना है कि यूपीए सरकार में 12 दिसंबर, 2012 को 126 राफेल राफेल विमानों को 10.2 अरब अमेरिकी डॉलर (तब के 54 हज़ार करोड़ रुपये) में खरीदने का फैसला लिया गया था। इस डील में एक विमान की कीमत 540 करोड़ थी।

इनमें से 18 विमान तैयार स्थिति में मिलने थे और 108 को भारत की सरकारी कंपनी, हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (एचएएल), फ्रांस की कंपनी के साथ मिलकर बनाती। 2015 में मोदी सरकार ने इस डील को रद्द कर इसी जहाज़ को खरीदने के लिए नई डील की।

नई डील में एक विमान की कीमत लगभग 1640 करोड़ होगी और केवल 36 विमान ही खरीदें जाएंगें। नई डील में अब जहाज़ एचएएल की जगह उद्योगपति अनिल अम्बानी की कंपनी बनाएगी। साथ ही टेक्नोलॉजी ट्रान्सफर भी नहीं होगा जबकि पिछली डील में टेक्नोलॉजी भी ट्रान्सफर की जा रही थी।

पिछले साल ही नवम्बर में आरोपों का जवाब देते हुए एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान निर्मला सीतारमन ने कहा था कि मैं आंकड़े देने से भाग नहीं रही हूं। साथ ही रक्षा मंत्री ने उनके साथ बैठे केंद्रीय रक्षा सचिव संजय मित्रा की ओर इशारा करते हुए डील की जानकारी साझा करने का निर्देश दिया था। उन्होंने कहा था कि एनडीए सरकार ने यूपीए के मुकाबले डील को सस्ते दामों में तय किया है।

लेकिन अब सीतारमन ने डील की जानकारी साझा न करते हुए फ्रांस और भारत के बीच हुए एक सीक्रेट पैक्ट की दुहाई दी है। सवाल ये उठता है कि क्या दो महीने पहले जानकारी साझा करने का वादा करते समय उन्हें इस पैक्ट की याद नहीं आई थी?

कैसे दो महीने बाद ही अचानक एक पैक्ट डील में आ गया है? क्या इसकी वजह देशभर में राफेल डील का चर्चित हो जाना है? ‘कुछ तो है जिसकी पर्दादारी है।’

 

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