रेलवे ने कमाई का एक नया धंधा ढूंढ लिया है जिसके लिए उसे कोई विशेष मशक्कत नहीं करनी पड़ती है । टिकट कैंसिल करने का चार्ज बढ़ाकर करोड़ों रुपए की कमाई करने वाला रेलवे भले ही बढ़ी हुई 25% कमाई से खुश हो लेकिन यात्रियों की जेब काटकर भी सुविधा न दे पाने वाले रेलवे की नाकामी इससे साफ झलकती है ।

टिकट कैंसिल करने के पीछे सबसे बड़ी वजह है रेल के परिचालन में देरी। यह बात सीएजी की रिपोर्ट में निकल कर आई है कि लगभग सभी सुपर फास्ट ट्रेनों का परिचालन देरी से हो रहा है ।

कई बार तो ट्रेन इतने घंटे लेट होती है कि यात्री परेशान होते हुए टिकट कैंसिल करा लेते हैं। ऐसी ही अन्य परिस्थितियों में भी टिकट कैंसिल कराने पर यात्री को भारी रकम चुकानी पड़ती है।

इसी वजह से बीते सत्र 2016-17 में रेलवे ने 14 सौ करोड़ की कमाई सिर्फ टिकट कैंसिलेशन चार्ज के रूप में कर ली है ,जो पिछले वर्ष के मुकाबले 25% ज्यादा है ।

इसके पीछे एक बड़ी वजह है कि नवंबर 2015 के बाद कैंसिलेशन चार्ज को दोगुना कर दिया गया था ।

जहां पहले एसी 3 tier में 48 घंटे पहले टिकट रद्द करने का चार्ज 90 लगता था अब वह 180 लगता है । जबकि एसी 2 tier में 100 रुपए की जगह अब ₹200 चुकाने पड़ते हैं ।

ये चार्ज तब लगते हैं जबकि 48 घंटे पहले टिकट कैंसिल किया गया हो अन्यथा ऐन वक्त पर टिकट कैंसिल करने पर भारी रकम वसूली जाती है।

साभार –इकोनॉमिक्स टाइम्स 

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