केंद्र सरकार के रेल मंत्री सुरेश प्रभु रेलवे की सुविधाओं और सुरक्षा को लेकर नए-नए दावें कर रहे हैं लेकिन दावों के विपरीत भारतीय रेलवे की हालत दिन-प्रतिदिन ख़राब होती नज़र आ रही है|

बिगड़ती स्थिति का अंदाज़ा इसी बात से लगाया जा सकता है कि उत्तरप्रदेश में 24 घंटों के भीतर 3 रेल हादसे हो गए| गनीमत ये रही की इन हादसों में किसी के हताहत होने की सूचना नहीं है लेकिन हादसों के कारण रेल सेवा घंटों प्रभावित रहीं|

मंगलवार देर रात दिल्ली-लखनऊ रूट पर बालामऊ जंक्शन के पास मालगाड़ी के गई डिब्बे पटरी से उतर गए, जिससे घंटों पूरा रूट बंद रहा। दूसरा हादसा बुधवार सुबह करीप पौने चार बजे हुआ, जब मालगाड़ी के 16 डिब्बे पटरी से उतर गए। हादसे के बाद बिहार और कलकत्ता जाने वाला रेल मार्ग पूरी तरह से ठप रहा। तीसरा हादसा बुधवार सुबह दिल्ली से लखनऊ आ रही शताब्दी एक्सप्रेस के साथ हुआ, जो कपलिंग टूटने की वजह से दो हिस्सों में बंट गई।

गौरतलब है कि, नवम्बर 2016 में कानपुर रेल हादसे में 150 लोगों को अपनी जान गवानी पड़ी थी| इसके अलावा कुछ दिनों पहले नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (CAG) की एक रिपोर्ट में बताया गया था कि भारतीय रेलवे का खाना इंसानों के खाने लायक नहीं है| रिपोर्ट में रेलवे की अन्य सुविधाओं के गिरते स्तर पर भी सवाल उठाए गए थे|

रेलवे की सुविधाओं का स्तर गिरने से लेकर सुरक्षा में भरी कमी तक के रोज़ नए मामले सामने आ रहे है लेकिन सरकार वर्तमान रेलवे नेटवर्क की मूलभूत समस्याओं पर काम ना करके बुलेट ट्रेन बनाने में 60 हज़ार करोड़ का निवेश करने जा रही है जिसमे सफ़र के लिए आम आदमी की जेब इजाज़त देगी भी या नहीं इसकी अभी कोइ खबर नहीं है|

रेलवे द्वरा बनाई गई सुरक्षा जाँच के लिए टास्क फ़ोर्स ने जनवरी 2017 में अपनी रिपोर्ट जमा करते हुए कहा था कि 50 से 60 % रेल हादसों में गलती रेल स्टाफ की होती है|

 

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