कुछ दिन पहले राजस्थान के उदयपुर में भीड़ ने अदालत को घेर लिया। भीड़ में से कुछ युवा अदालत की छत पर धार्मिक ध्वज लेकर चढ़ गए। ध्वज लहराने लगे। उस मामले का खलनायक कौन था, क्या हुआ, क्या आप जानते हैं ?

किसी न्यूज़ चैनल को आपने उस पर घंटों बहस करते देखा था? यह जानना जरूरी है कि कुछ लोग मुल्क की भावना से खिलवाड़ कर रहे हैं।

न्यूज़ चैनलों पर गुंडा एंकर दो समुदाय विशेष का पीछा करते हैं। उनके युवा नेताओं को खलनायक के रूप में चित्रित करते हैं। मगर उदयपुर जैसी घटना पर चुप्पी मार जाते हैं।

टीवी ने अपना एजेंडा साफ कर दिया है। आपके धीरज का जवाब नहीं, इन गुंडा एंकरों को देखने के लिए आप पैसे भी दे रहे हैं। जो बेरोज़गार है, उसकी नौकरी की बात कोई नहीं कर रहा है, तब भी युवा बेरोज़गार पैसे देकर केबल चैनल देखते हैं।

बाहुबलियों के प्रति जनता का आकर्षण यूँ ही नहीं रहता है। channels have become urinals and you are paying for these urinals even if you are not allowed to relieve yourself. Channels are restricted for few and yet you are watching them.

इसे कहते हैं लाटरी निकलना। टीवी देखते रहो। गुंडा एंकरों से ज्ञान प्राप्त करते रहो।

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