किसानों की क़र्ज़ माफी की वकालत करता रहा हूँ। अच्छा लग रहा है अब सरकारें भी कर रही हैं। बैंक अगर छह लाख करोड़ का ए पी ए उठा सकते हैं तो दो लाख करोड़ और सही। कम से कम तीन लाख किसान आत्महत्या के लिए मजबूर तो नहीं होंगे।

जो लोग किसानों की क़र्ज़ माफी का विरोध कर रहे थे, तीन साल बीतते बीतते उन्हें समर्थन करना होगा या किनारा करना होगा।

भारत के दो बड़े राज्यों में क़र्ज़ माफी को नीतिगत समर्थन मिला है। उन्हें शुभकामनायें। अब सबका माफ हो। अगर मगर के साथ नहीं, पूरा का पूरा । क़र्ज़मुक्त अन्नदाता ही भारत का भाग्यविधाता है। ये नारा मेरा है।

Loading...
loading...