अब ये तय कौन करेगा की कौन गुंडा है और कौन नहीं पुलिस, कानून या पत्रकार। कुछ ऐसा ही हुआ दिल्ली की हुकांर रैली में जहां जिग्नेश मेहवाणी सहित कई छात्र नेता भीम आर्मी के चन्द्रशेखर की रिहाई को लेकर मंच से हुंकार भरी। मगर इसी बीच मीडिया के कई हिस्सों ने रैली का दूसरा रूप दिखाना चाहा जो झूठा होने के कारण ज्यादा देर तक टिक नहीं पाया।

दरअसल युवा हुंकार रैली में भीड़ ने रिपब्लिक टीवी का विरोध कर रहें थे। जहां महिला पत्रकार जिसका नाम शिवानी गुप्ता बताया जा रहा है उन्होंने भीड़ पर बदसलूकी करने का आरोप लगाया  है। महिला रिपोर्टर का आरोप है कि रैली में आए लोगों ने उसके साथ बदतमीजी की, धमकाया और साथ ही आपत्तिजनक कमेंट भी किये।

फिर क्या था अर्नब गोस्वामी ने डिबेट की शुरुआत ही टुकड़े-टुकड़े गैंग से की। यानी की रैली में मौजूद लोग जो शामिल हुए थे जैसे कन्हैया, शेहला राशिद, उमर खालिद जैसे कई छात्र नेता।

अर्नब ने भीड़ को गुंडा कह दिया और आगे कहा कि ‘जिग्नेश मेवानी का असली चेहरा सामने आ गया है। जिग्नेश के गुंडों ने हमारी महिला रिपोर्टर के साथ बहुत गलत बर्ताव किया है।

मगर असल मामला तब सामने आया जब इन तस्वीरों में एबीपी  न्यूज के एक सीनियर रिपोर्टर जैनेंद्र कुमार को भी गुंडा कहा जाने लगा। जबकि इन दोनों का कहना है कि वह वहां पर एक आम इंसान की तरह खड़े होकर अपना काम कर रहे थे और उनका रिपब्लिक के रिपोर्टर से कोई मतलब ही नहीं था।

फोटो वायरल हो गई क्योकिं रिपब्लिक ने इस तस्वीर को ऑन-एयर दिखा दिया। हंगामा होना तय था। एबीपी न्यूज़ के एंकर अभिसार शर्मा ने रिपब्लिक टीवी को जमकर कोसा और कहा की “कल रिपब्लिक  नाम के तथाकथित न्यूज़ चैनल ने ना सिर्फ एक बेकसूर आम इंसान को अपने Prime टाईम मे गुंडा बताया बल्कि टीवी के बेहतरीन रिपोर्टर मे से एक ‘जैनेंद्र कुमार’ को भी गोला मार मार के गुंडा बताया! ये चैनल क्या है? कौन है? कहाँ से आ गया है?

किस तरह के मानसिक तौर पर बीमार लोग इसे चला रहे हैं? गुंडा कौन है यहाँ? जो अपनी मनमानी से कुछ भी चलाए? जो पार्टी विशेष की सुपारी लेकर दूसरे लोगों को बदनाम करे? ये पहली बार है जब किसी अन्य न्यूज़ चैनल ने एक दूसरे न्यूज़ चैनल के जाने माने रिपोर्टर को गुंडा बताया है। ये लोग सभी हदें पार कर रहे हैं! कोई अंकुश लगाने वाला भी नहीं मीडिया के इन सुपारी वीरों पर?

अब इस तरह से किसी को भी गुंडा कह देना कौन सा नैतिक मूल है ये तो खुद को टीआरपी किंग कहने वालें अर्नब जाने। मगर मीडिया ही राजनैतिक दलों की तरह बर्ताव करने लगेगा तो दर्शक कहां जायेंगे फिर?

क्या ये सही है की किसी को भी गुंडा माफिया जैसे शब्द नवाज़ दिया जाये भले ही वो पत्रकार,टीचर या फिर किसी सम्मानीय पद पर ही क्यों न हो? इसका जवाब उन्हें देना चाहिए की रिपोर्टर के बचाव में किसी को कटघरे में खड़ा किया जा सकता है?

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