एक कवि की रचना में हर रस मौजूद होता है। वह हसाता भी है वह गुदगुदाता भी है। अगर उसकी रचना में व्यंग शामिल हो जाए तो राजनीतिक दलों की नींद भी उड़ा सकता है।

इन दिनों मशहूर कवि सरल संपत का एक वीडियो खूब देखा जा रहा है। जिसमें तमाम ऐसे ऐसे कटाक्ष शामिल है। जिन्हें सवाल बना दिया जाए तो उनकी हकीकत सच में काफी हुकूमतों और उनके हुक्मरानों से जवाब मांगने पर उठ खड़ी होगी।

कवि सरल संपत ने कहा कि मैं कुछ दिन पहले न्यूयॉर्क जा रहा था। लेकिन यह झूठ है। और झूठ बोलना भी मैने अपने पीएम मोदी से सीखा है उन्होंने ही कहा है झूठ बोले पर विजन बड़ा होना चाहिए। इस मंच पर तमाम बड़े कवि,शायर मौजूद हैं।

इसके बाद उन्‍होंने आगे कहा, ”मैं तो घर की देहरी पर बैठा था कि एक सज्‍जन रोते-पीटते आए। रात को शायद स्‍वच्‍छ भारत अभियान के तहत एक चोर उनका घर साफ कर गया था। झल्‍लाते हुए बोले- संपत जी, क्‍या यही हैं अच्‍छे दिन। मैंने कहा कहने वालों ने ये थोड़ी कही थी कि सिर्फ साहूकारों के ही अच्‍छे दिन आएंगे। सरकार का एक लक्ष्‍य सबका साथ, सबका विकास भी तो है।”

कवि सरल संपत यहीं नहीं रूके उन्होंने आगे कहा कि, राजनीतिक पार्टियों को आरटीआई को दायरे में ले आओ फिर हम जाने सीना कितने इंच का है। कवि सरल संपत ने मंच से तमाम सत्ता राजनीतिक गलियारों को चुभने वाले व्यंग मारे इसलिए यह वीडियो सोशल मीडिया से लेकर तमाम जगह वायरल हो गया।

 

 

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