हमें बचपन से सिखाया जाता है की बड़े-बुजुर्गो का हमेशा आदर सत्कार करना चाहिए। मगर उत्तर प्रदेश के अधिकारी शायद बचपन में दी गई इस सीख को भूल गये और अफसरशाही का घमंड इतना की बुजुर्ग थप्पड़ जड़ते हुए उनके दांत तोड़ दिए।

मामला आजमगढ़ के निजामाबाद का है जहां 92 वर्षीय प्रेम सागर पाठक को न्याय की आस में अधिकारियों के सामने जाना महंगा पड़ गया। तहसील दिवस के अवसर पर मौजूद एसडीएम निजामाबाद अनिल कुमार सिंह ने डीएम चंद्रभूषण सिंह की मौजूदगी में बुजुर्ग को थप्पड़ मार दिया। जिससे बुजुर्ग का चार दांत टूट गये और खून बहने लगा। इतना ही नहीं, थप्पड़ मारने के बाद सिपाहियों ने लाठी से ढकेल कर कमरे से बाहर कर दिया।

वकीलों की मदद से बुजर्ग जिला अस्पताल में भर्ती कराकर मेडिकल मुआयना कराया गया है।

दरअसल, साल 2014 में कुछ लोगों ने प्रेम सागर पाठक की जमीन पर सरकारी खर्चे से जबरन आरसीसी रोड बनवा दी। न्याय की आस लगाये 92 वर्षीय बुजुर्ग ने डीएम, एसपी, एसडीएम और थानाध्यक्ष के ऑफिसों के बहुत चक्कर लगाये मगर सुनवाई तो दूर उन्हें देख लोग उन्हें बाहर जाने को कहते।

बुजुर्ग ने बताया कि, रोड बनने से बारिश का पानी उनके घर में घुस रहा है। तहसील दिवस और थाना दिवस में कई बार प्रार्थना पत्र देने के बाद भी आश्वासन ही मिलते रहे। मंगलवार को निजामाबाद के तहसील दिवस में डीएम मौजूद थे। प्रेम सागर ने डीएम के सामने अपनी बात रखी। लगातार भाग-दौड़ से तंग आ चुके पाठक ने न्याय न मिलने पर धरना देने या आत्मदाह करने की चेतावनी दे दी। वृद्ध की चेतावनी से डीएम का पारा चढ़ गया।

इसे देख एसडीएम निजामाबाद ने प्रेम सागर को थप्पड़ जड़ दिया। घटना के बाद तहसील परिसर में थोड़ी देर के लिए हड़कंप मच गया। मगर एसडीएम अनिल कुमार सिंह का कहना है कि उन्होंने प्रेम सागर को थप्पड़ नहीं मारा। वह डीएम से तैश में बात कर रहे थे। इसलिए उन्हें कमरे से बाहर कर दिया गया। प्रेम सागर पाठक (92) सरायमीर थाना क्षेत्र के फरीदूनपुर गांव के निवासी हैं। प्रेम सागर का आरोप है कि एसडीएम और लेखपाल से मिलीभगत कर उनकी जमींन पर कब्ज़ा जमाए बैठे है।

योगीराज में अफसरों के बढ़ती तानाशाही जब 92 वर्षीय बुजुर्ग को न्याय दिलवाने के बजाए उन्हें लात घुसे मिल रहे हो तो प्रदेश में एक भय का माहौल तो पैदा होता है। योगी सरकार में लगातार बढ़ती अपराध की घटनाए चिंता का विषय बनी हुई है। मगर जो न्याय की कुर्सी पर बैठे है अगर वो भी ऐसा बर्ताव करने लग जाये तो आम जनता के लिए की कौन सा रास्ता बचेगा ये तो सरकार ही बेहतर जाने।

 

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