देश के इतिहास में पहली बार सुप्रीम कोर्ट के चार जजों ने प्रेस कॉन्फ्रेंस की। इन न्यायाधीशों में जस्टिस जे. चेलामेश्वर, जस्टिस रंजन गोगोई, जस्टिस मदन लोकुर और जस्टिस कुरियन जोसेफ शामिल हैं| वहीं जजों की प्रेस कॉन्फ्रेंस के बाद सीनियर वकीलों की तरफ से इस पर टिप्पणी आई है।

वरिष्ठ अधिवक्ता केटीएस तुलसी ने कहा कि, ये बहुत दुखद है। यह सुप्रीम कोर्ट का मामला है जो लोगों के विश्वास से जुड़ा हुआ है। ऐसे में सुप्रीम कोर्ट के जजों ने जो आरोप लगाए हैं, उसकी जांच होनी चाहिए ताकि देश और लोगों का विश्वास बना रहे।

उन्होंने कहा कि किसी जज के खिलाफ कोई मामला सामने आए तो ऐसे में उस जज को अपने आपको उस मामले से अलग कर लेना चाहिए। ऐसा नहीं हुआ है तभी तो जज मीडिया के सामने आए हैं। जजों का ऐसे सामने आना धूप की किरण की तरह है, जिसकी रोशनी के पड़ते ही सारी चीजें छट जाती हैं, ये सुप्रीम कोर्ट के लिए बेहतर भी है।

वहीँ मशहूर वकील प्रशांत भूषण ने कहा कि जिस तरह प्रसाद मेडिकल कॉलेज मामले में जो कुछ मुख्य न्यायाधीश ने किया, जिस तरह उन्होंने ये केस सीनियर जजों से लिया और उससे डील किया वो कोड ऑफ कंडक्ट का उल्लंघन था। जिस तरह सीजेआई अपनी ताकत का दुरूपयोग किया, उससे किसी को तो टकराना ही था।

उन्होंने कहा जिस तरह ये चारों जज सामने आए ये ऐतिहासिक है तो दुर्भाग्यपूर्ण भी लेकिन ये जरूरी भी। इसके दूरगामी परिणाम होंगे| इन जजों ने अपना संवैधानिक दायित्व निभाया है।

Loading...
loading...