वे तुम्हें रोजाना मारेंगे, तरह-तरह से मारेंगे, आत्महत्या के लिए मजबूर कर देंगे, तुम्हें जेल में डाल देंगे, कोई सुनवाई नहीं होगी, तुम्हें नौकरी से बाहर कर देंगे, तुम्हें तरह-तरह से तबाह करेंगे, ऐसे-ऐसे आरोप मढेंगे कि तुम डरकर घुटने टेक दो, तुम्हारे बच्चों को भी परेशान करेंगे,

कभी दंगा करायेंगे, कभी शोभायात्रा निकालेंगे, कभी भोज करेंगे, कभी गोली चलायेंगे, कभी उपवास करेंगे, कभी बस्ती जलायेंगे, कभी मातम मनायेंगे, कभी तुम्हारी चीखों पर अट्टहास करेंगे और कभी तुम्हें भरमाने के लिए आंसू निकालेंगे।

फिर एक दिन अचानक तुम्हारे बीच से किसी को खोजकर कोई बड़ा ओहदा दे देंगे और कहेंगे, देखो, यह तुम्हारे जैसा ही है, अब जुल्मोसितम के वो सारे सिलसिले को भूल जाओ, आओ समर्पण कर दो, वर्ना तुम्हें मिटा दिया जायेगा!

उनके पास ऐसी ऐसी बहुत सी तरकीबें, बहुत से मसले और बहुत से जुमले हैं। इनके बल पर वे अपने जुल्म के राज को स्थायी समझते हैं। पर वे इतिहास से कुछ भी नहीं सीखते! कोई सबक नहीं लेते!

इतिहास गवाह है, जुल्मियों के अभेद्य समझे जाने वाले किलों को साधारण से लोगों ने अपनी असाधारण एकता के दम पर बहुत आसानी से ध्वस्त किया है! कोई भी मुल्क, कोई भी समाज इसका अपवाद नहीं। बस, जरुरत होती है, ईमानदार कोशिशों की, प्रतिबद्धता और एकता की!

Loading...
loading...