देश में मुसलामानों के खिलाफ बढ़ रही हिंसक घटनाओं के विरोध में मशहूर सामाजिक कार्यकर्ता शबनम हाशमी  ने अपना राष्ट्रीय अल्पसंख्यक अधिकार पुरस्कार आयोग को वापस कर दिया है।

अपना पुरस्कार वापस करने के बाद हाशमी ने कहा कि  “मैं अल्पसंख्यक समुदाय के लोगों पर लगातार हो रहे हमलों और हत्याओं के विरोध में अपना राष्ट्रीय अल्पसंख्यक अधिकार पुरस्कार’ वापस लौटाती हूं, क्यूंकि आयोग ने  अपनी पूरी विश्वसनीयता खो दी है।’

हाशमी ने आज सुबह फेसबुक पर लिखा था कि ‘ मैं आज 2 :30 बजे राष्ट्रीय अल्पसंख्यक आयोग जा रही हूँ ,देश में अल्पसंख्यक समुदाय के खिलाफ बढ़ रही हिंसक घटनाओं , नौजवानों पर हो रहे हमलों और सरकार की तरफ से इन हमलावरों को खुला सपोर्ट होने के विरोध में अपने राष्ट्रीय अल्पसंख्यक अधिकार पुरस्कार वापिस करने ।’

आपको बता दे कि शबनम हाशमी एक मशहूर सामाजिक कार्यकर्ता और मानव अधिकारों की प्रचारक है | वह अनहद की संस्थापक है और 2002 में गुजरात दंगों के बाद वह लंबा समय गुजरात में रही हैं |उन्होंने अपना ज़्यादातर जीवन मानव अधिकार की रक्षा और सांप्रदायिक और कट्टरपंथी ताकतें के खिलाफ संघर्ष करते हुए गुज़ार दिया

उन्होंने कहा ‘ राष्ट्रीय अल्पसंख्यक आयोग को अल्पसंख्यक समुदाय की गरिमा, सुरक्षा और संवैधानिक अधिकार सुनिश्चित करने में सक्रिय भूमिका निभानी चाहिए| लेकिन एनडीए सरकार में अल्पसंख्यकों पर हमलों पर ” चुप्पी” बनाए रखना इस आयोग की विफलता को पेश करता है |’

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