हिंसा का जवाब हिंसा नहीं दिया जा सकता है। गांधीगिरी ने हिंदुस्तान को शायद यही सिखाया है। कोई एक गाल पर थप्पड़ मारे आप अपना दूसरा गाल आगे कर दें ये बात भी पुराने जमाने की हो चली हैं।

राष्ट्रपिता महात्मा गांधी ने हमेशा अहिंसा का पाठ पढ़ाया। गांधीगिरी सिखायी शायद तभी आजतक यह मुल्क हथियारों से कम मीठी जुबान से ज्यादा लड़ता आया है।

जीता भी है। हारा भी है। लेकिन शायद अब इस मुल्क में ज्यादा समझने और सहने की ताकत जवाब देने लगी है।

तभी हिंसा का जवाब हिंसा से देने की मांग उठने लगी है। हाल में गौरक्षका के नाम पर पूरे देश हो रही गुंडागर्दी को जवाब मिला है।

कश्मीर से लेकर पंजाब में गौरक्षकों के झुंड जिससे प्रधानमंत्री भी शायद परेशान हैं उन्हें पीटा गया।

तमाम जगह से इन गुंडों को उनकी भाषा में जवाब देने वाले वीडियो आऩे लगे हैं।

बीते रोज ही सोशल मीडिया पर एक वीडियो वायरल हुआ जिसमें सिख लड़कों ने भीड़ बनकर गुंडागर्दी कर रहे गुंडों को दौड़ा-दौड़ाकर पीटा।

तभी सोशल मीडिया पर इस तरह की मांग उठने लगी कि, क्यों न इस तरह की गुंडों की भीड़ को उत्तर प्रदेश, मध्यप्रदेश, झत्तीसगढ़ औऱ झारखंड में दौड़ा-दौड़ाकर पीटा जाए।

तो क्या हिंसा को रोकने के लिए लोग हिंसा का सहारा लेने जा रहे हैं ?

अगर सब भीड़ बनाकर मारने औऱ सुधारने वाले बन जाएंगे तो फिर देश में कानून-संविधान का क्या काम होगा ?

अगर दोनों भीड़ आमने-सामने आ जाएगी तो फिर क्या होगा, हिंसा…हिंसा..और हिंसा

हरतरफ हिंसा ही हिंसा फैली होगी। न कोई किसी को बचाने वाला होगा, न कोई किसी की सुनने वाला होगा। सब एक दूसरे को मार रहे होंगे !

सोशल मीडिया पर हजारों लोग इस मांग के समर्थन में आगे आ जाएँगे, फिर क्या होगा ? यह सवाल है।

आपको बता दें कि, एकतरफ जब सिख लड़के इन गुंडों को मार रहे थे तभी यूपी के फर्रूखाबाद जनपद की पैंसेजर ट्रेन में एक भीड़ परिवार के 10 लोगों को बेरहमी से पीट रहे थे।

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