मोदी सरकार बनने के बाद देशभर में अल्पसंख्यक समुदायों के बीच डर का माहौल देखा जा रहा है। लम्बे समय की शांति के बाद पंजाब में भी एक बार फिर से बगावत की आवाज़ें उठती हुई दिखाई दे रही है।

सोशल मीडिया से लेकर पंजाब की सड़कों पर एक नया अभियान शुरू किया गया है। जिसको नाम दिया गया है ‘पंजाब जनमत 2020’ मतलब कि 2020 में पंजाब को आज़ादी दी जाए। ये अभियान सोशल मीडिया पर बने कई पेजों के ज़रिये बढ़ाया जा रहा है।

पंजाब के कई बड़े शहरों में ‘सिख जनमत संग्रह 2020’ के पोस्टर लगाए जा रहे है। पंजाब के अमृतसर, लुधियाना, बरनाला, संगरूर, बठिंडा, मुक्तसर जैसे बड़े शहरों में ये पोस्टर अब आम ही दिखाई देने लगे है। ये सारे पोस्टर ‘सिख फॉर जस्टिस ‘ नाम की संस्था लगवा रही है जिसने पंजाब में 2020 में जनमत करने की मांग की है।

वहीँ भाजपा ने प्रेस कांफ्रेंस कर मांग की थी कि इन होर्डिंगस को हटाया जाए। भाजपा के स्थानीय नेताओं ने सरकार की तरफ से पोस्टर न उतारने पर खुद उन पोस्टरों को उतारने की धमकी दी थी।

भाजपा की प्रेस कांफ्रेंस के जवाब में ‘सिख फॉर जस्टिस’ ने अपने ट्विटर अकाउंट से भाजपा नेताओं को भूलकर भी पोस्टरों को हाथ न लगा देने की धमकी दे दी।

‘सिख फॉर जस्टिस’ ने कहा कि, अगर पोस्टर हटाए गए तो भाजपा को नतीजे भुगतने पड़ेगे। वहीँ ‘सिख फॉर जस्टिस’ की तरफ से पूरे पंजाब में ऐसे पोस्टर लगातार लगाए जा रहे है और सरकार कोई कदम नहीं उठा रहीं।

इन पोस्टरों में अकाल तख़्त साहिब की फोटो भी लगाई गई है। जिस पर भाजपा के सहयोगी अकाली दल का कब्ज़ा है।

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