भोपाल के आरकेडीएफ मेडिकल कॉलेज की मान्यता खत्म होने के बाद से दूसरे कॉलेजों में प्रवेश के लिए भटक रहीं छात्राओं की पुलिस से झड़प हो गई। छात्राओं का आरोप है कि पुलिस जवानों ने उनके साथ धक्का-मुक्की की, उनके बाल पकड़कर खींचा, हाथ मरोड़े और अपशब्द भी कहें। जबकि पुलिस का कहना है की ऐसा कुछ नहीं हुआ है।

शुक्रवार को करीब 150 की संख्या में छात्र-छात्राएं अपने परिजन के साथ दोपहर 12 बजे विरोध जताने मुख्यमंत्री निवास गए थे, पर सुरक्षा में लगे पुलिस जवानों ने उन्हें यह कहते हुए लौटा दिया कि मुख्यमंत्री अभी नहीं हैं। इससे छात्र और उनके परिजन नाराज हो गए और रैली लेकर मंत्रालय की तरफ बढ़ने लगे, पर पुलिस ने उन्हें पहले ही रोक लिया।

नाराज़ छात्रों को रोकने की वजह से बहस होने लगी, और दोनों में झड़प हो गई। हिमांशु नाम के एक छात्र ने बताया कि उन्होंने लाखों रुपए खर्च किए हैं और अब कॉलेज में प्रवेश नहीं मिल रहा है। सरकार भी कोई हल नहीं निकाल रही है, जबकि कोर्ट ने सरकार को प्रवेश दिलाने को कहा है।

खबरों के मुताबिक, नाराज छात्र मुख्यमंत्री की गैर मौजूदगी में अपर मुख्य सचिव राधेश्याम जुलानिया से मिलना चाहते थे। पर जब पुलिस ने उन्हें आगे नहीं जाने दिया तो वे भड़क गए और प्रदर्शन की कोशिश करने लगे। प्रदर्शन के दौरान कुछ छात्र और उनके परिजन सड़क पर बैठ गए। पुलिस ने उन्हें उठाने की कोशिश की, लेकिन वे नहीं माने, जिसके कारण पुलिस ने उनके साथ धक्का-मुक्की कर दी।

आखिर में प्रवेश के लिए भटक रहे नाराज छात्रों की ना तो प्रदेश के मुख्यमंत्री से बात हुई और ना ही अपर मुख्य सचिव राधेश्याम जुलानिया से। छात्रों को पुलिस कि मार खाकर ही वापस लौटना पड़ा।

इस मामले पर मध्यप्रदेश के कांग्रेस अध्यक्ष अरुण यादव ने ट्वीट करते हुए कहा है कि, “भोपाल में भविष्य के डॉक्टरों से इस तरह का पुलिस का व्यवहार शर्मनाक और निंदनीय है। शिवराज सिंह जी आपसे मिलने आ रही छात्राओं को इस तरह बाल पकड़कर ले गए पुलिस वाले। ऐसे हाल है आपके राज में भांजियों के साथ।

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