बुधवार को राज्यसभा में सीपीआई (एम) के नेता सीताराम येचुरी ने ‘भारत छोड़ो आन्दोलन’ की 75वीं वर्षगाठ पर उस समय में देश में आज़ादी के लिए उठ रहे आन्दोलन में सभी का साझा योगदान और एकता की याद दिलाई। साथ ही देश में अमीर और गरीब के बीच बढ़ती आर्थिक खाई पर भी चिंता जताई।

येचुरी ने कहा कि, 1921 में पहली बार एक सम्पूर्ण स्वतंत्र आन्दोलन की शुरुआत अहमदाबाद में हुई थी जिसको शुरू करने वाले थें मौलाना हसरत मोहनी और स्वामी कमरा नंदा।

येचुरी ने कहा कि, अगर भारत छोड़ो आन्दोलन के बारे में बात हो रही है तो हमें एक बात को ध्यान में रखना चाहिए और वो हमारी साझा विरासत है।

येचुरी ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी ने अपने कार्यक्रम मन की बात में कहा की 1942 से 1947 बहुत ही महत्वपूर्ण समय था और अब 2017 से 2022 तक वैसा ही समय है जिसमें हम वो ही लक्ष्य प्राप्त करेंगें।

उस समय देश में सांप्रदायिक हिंसा भी चरम पर थी तो क्या प्रधानमंत्री वो भी प्राप्त करना चाहते हैं ?

भाजपा राज में बढ़ी आर्थिक खाई

इसके अलावा येचुरी ने राज्यसभा में अमीरों की बढ़ती संपत्ति और गरीबों की ख़राब होती हालत पर भी विचार रखे।

येचुरी ने कहा कि, 2014 में 49% GDP 1% जनता द्वारा आयोजित की जा रही थी लेकिन 2016 के आकड़ों के मुताबिक, 58.4% GDP 1% जनता द्वारा आयोजित की जा रही है। येचुरी में कहा कि ये आंकड़ा भी पिछले साल का है और अब ये और भी ज़्यादा बढ़ गया होगा।

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