केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार के लाख दावों के बावजूद देश में नोटबंदी का सीधा असर रोजगारों पर पड़ा है। हाल ही में आई सीएमआईई (सेंटर फॉर मोनिटरिंग इंडियन इकॉनमी) की रिपोर्ट के अनुसार साल 2017 के शुरुआती 4 महीने में ही 15 लाख लोग बेरोजगार हो गए हैं।

सीएमआईई ने दिसंबर 2016 यानी नोटबंदी के ठीक बाद रिपोर्ट जारी कर बताया था कि आखिरी के चार महीनों में 15 लाख लोगों को रोजगार मिला है। वहीं, इस साल पहले चार महीने में जहां 15 लाख नौकरियां गईं वहीं पहले से ही 96 लाख लोग बेरोजगार थे। इसका सीधा मतलब ये है कि मौजूदा वक़्त में देश में 1 करोड़ 10 लाख बेरोजगारी की मार जेल रहे हैं।

मोदी सरकार ने भी जारी किये थे `आंकड़े`

मोदी सरकार ने 2016 में आंकड़े जारी कर बताया था की 2016 में 2 लाख 31 हज़ार लोगों को रोजगार मिला है। जिन क्षेत्रों में नौकरियां दी गईं उनमें मैन्युफैक्चरिंग, कंस्ट्रक्शन, ट्रेड और 8 अन्य सेक्टर शामिल हैं। वहीं 2015 कि बात करें तो ये साल और भी बुरा रहा इस साल सरकार सिर्फ 1 लाख 55 हज़ार नौकरियां ही दे पाई थी। जबकि 2014 की शुरुआत में 4 लाख 21 हज़ार लोगों को रोजगार मिला था जिसमें से 70 फीसदी नौकरियां साल के पहले चार महीनों में दी गई थी। अगर मौजूदा सरकार कि बात करें तो 3 साल में अभी 9 लाख 97 हज़ार लोगो को नौकारियां मिली हैं, जो यूपीए के दूसरे कार्यकाल के पहले साल से करीब 1 लाख कम है।

मोदी सरकार के तीन साल बनाम कांग्रेस का 2009 पहला साल

कांग्रेस 2009 में जब दुबारा सत्ता में आई तो सरकार के शुरूआती साल में यानी 2009 में 10.06 लाख लोगों को रोजगार मिला था। इसका सीधा मतलब है कि मोदी सरकार ने जितना 3 सालों में रोजगार दिया था उससे करीब 1 लाख ज्यादा रोजगार कांग्रेस ने 2009 में अपनी सरकार बनते ही दे दिए थे।

बता दें कि, सीएमआईई देश की वितीय मामलों कि बड़ी वेबसाइट है जो वक़्त-वक़्त पर उद्योग में रोजगार को लेकर आंकड़ों के साथ अपनी रिपोर्ट और रिसर्च पेश करती रहती है। ताजा रिपोर्ट जुलाई महीने में ही पेश कि गई है।

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