उत्तरप्रदेश निकाय चुनाव के नतीजे घोषित हो चुके हैं। साथ ही नतीजों को लेकर प्रदेश में गर्मागर्मी भी शुरू हो गई है। ये आरोप लग रहा है कि ईवीएम मशीनों से छेड़छाड़ कर नतीजों को भाजपा के पक्ष में करा गया है।

ऐसा ही आरोप पार्षद प्रत्याशी अपूर्वा वर्मा ने लगाया है। अपूर्वा जानकीपुरम वार्ड नंबर 58 से पार्षद प्रत्याशी हैं। उनका कहना है कि उनके वार्ड में ईवीएम से छेड़छाड़ की गई है। उनके अलावा इस वार्ड से अन्य 15 प्रत्याशियों ने भी यही आरोप लगाया है और चुनाव दोबारा कराने की मांग की है।

अपूर्वा ने बताया कि चुनाव से पहले जिन ईवीएम मशीनों पर सभी पार्टियों और उम्मीदवारों की मोहर और हस्ताक्षर किये गये थे वो मशीनें हैं ही नहीं। मशीनें बदल दी गई हैं और नई मशीनों पर किसी के हस्ताक्षर नहीं हैं।

कई प्रतियाशियों का ये भी आरोप है कि परिणाम में ये दिखाया जा रहा है कि उन्हें एक भी वोट नहीं मिला जबकि कई प्रतियाशियों के घर-परिवार के वोट ही लगभग 50 थे। प्रत्याशियों का कहना है कि उन्होंने स्वयं तो अपने लिए ही वोट डाला था लेकिन परिणाम में शून्य (0) दिखाया जा रहा है।

उन्होंने ने बताया कि जिस दिन वोटिंग हो रही थी उसदिन भी क्षेत्र के सेंटथॉमस स्कूल में उन्होंने भाजपा के एजेंटों को बिना आधार कार्ड या अन्य पहचान पत्र के पर्चियां दालते हुए पकड़ा था।

उसके बाद उन्होंने मजिस्ट्रेट अभिनव रंजन को इस बात की खबर दी। फिर मजिस्ट्रेट रंजन फोर्स के साथ वहां आए और उन्होंने भी इस बात को माना जिसके बाद उस स्कूल में चल रही पोलिंग को रद्द किया गया।

अपूर्वा ने डीएम को भी चुनाव रद्द कराने के लिए पत्र लिखा है। पत्र पर भाजपा प्रतियाशी को छोड़कर सभी अन्य प्रत्याशियों ने हस्ताक्षर किये हैं। अपूर्वा का कहना है कि पूरा प्रशासन भाजपा के साथ मिला हुआ है।

उन्होंने बताया कि जब उन्होंने चुनाव परिणाम आने के बाद मजिस्ट्रेट से शिकायत की तो मजिस्ट्रेट ने उन्हें जेल भिजवाने की धमकी दी।

 

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