मीडिया ने आधा सच बताकर औऱ आधा सच छुपाकर देश को गुमराह करने को खेल शुरू कर दिया है। कई बार इस गुमराह करने के खेल में मीडिया की पोल खुल चुकी है।

बीते रोज भी एक ऐसा खेल खेला गया जो सत्ताधारी पार्टी के समर्थन में हवा बनाने के लिए रचा गया था। शाम तक आते-आते उसपर सवाल उठने लगे। फिर भी मीडिया ने आधी सच्चाई ही दिखाई।

यूपी निकाय चुनाव में नगर निगम की जीत को अग्निपरीक्षा घोषित कर पास करा दिया लेकिन पंचायत और पालिका के नतीजों पर बात नहीं की।

मार्च 2017 के विधानसभा नतीजों पर अगर गौर करें तो भाजपा की निकाय चुनाव में बुरी तरह हार हुई है। वोटिंग प्रतिशत काफी गिरा है।

लेकिन गुजरात चुनाव के मद्देनजर मीडिया ने भाजपा पर जीत का सेहरा बांध दिया। जबकि 2012 में दशक से सत्ता से दूर भाजपा को नगर निगम की 12 सीटों में 10 पर विजय हासिल हुई थी। फिर इस बार सत्ता के होने के बावजूद भारी जश्न क्यों ?

इस बार निकाय चुनाव में पंचायत और पालिका के चुनाव में भाजपा को बढ़त नहीं मिली है। इस बात पर मीडिया ने सवाल नहीं उठाया बल्कि अमेठी हार पर कांग्रेस को घेरा है।

निकाय चुनाव में सीएम योगी आदित्यनाथ अपना वार्ड पार्षद प्रत्याशी नहीं जीता पाए। वहां निर्दलयी प्रत्याशी ने बाजी मारी।

वहीं डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्या अपने जिले की नगर पंचायत पर भाजपा को नहीं जीता पाए। कैबिनेट मंत्री सुरेश खन्ना अपनी नगर पालिका नहीं जीता पाए।

इन सारी बातों को मीडिया ने किनारे रख दिया। मालिक ने झुकने को बोला वह गिरकर पत्रकारिता करने में लग गई।

आपको बता दें कि, गुजरात चुनाव के लिए मीडिया ने भाजपा के पक्ष में पैकेज तैयार किया था जिसकी मोटी रकम भी लेने की संभावना जताई जा रही है।

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