उत्तर प्रदेश सरकार ने गुरुवार को इलाहाबाद हाई कोर्ट को सूचित किया कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ (तब गोरखपुर के सांसद) पर 2007 में गोरखपुर दंगे भड़काने का केस नहीं चलेगा।

हाई कोर्ट ने यूपी के मुख्य सचिव राहुल भटनागर को पिछले सप्ताह तलब किया था और गोरखपुर दंगें से जुड़े सभी दस्तावेजों को अदालत में लाने को कहा था। इस मामले में स्थानीय सांसद और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्य नाथ आरोपी हैं।

इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने ये आदेश परवेज परवाज नाम के शख्स की याचिका पर सुनवाई के दौरान दी थी।  घटना के गवाह असद हयात भी इस मामले में याचिकाकर्ता है। इससे पहले अदालत ने इस मुकदमे में सीएम योगी आदित्य नाथ पर मुकदमा चलाने की अनुमति ना देने के लिए राज्य सरकार को फटकार लगाई थी।

क्या है मामला?

2007 जनवरी महीने में उत्तर प्रदेश के गोरखपुर में दो समुदायों के बीच दंगा हुआ था। इस दंगे में कथित रूप से दो लोगों की मौत हो गई थी और कई लोग घायल हो गये थे।

इस मामले में तत्कालीन बीजेपी सांसद योगी आदित्य नाथ, स्थानीय विधायक राधा मोहन दास अग्रवाल, और उस समय शहर की मेयर रही अंजू चौधरी पर आरोप है कि इन लोगों ने पुलिस के मना करने के बावजूद रेलवे स्टेशन के पास भड़काऊ भाषण दिया था जिसके बाद ये दंगे  भड़के थे। पुलिस के मुताबिक ये विवाद मुहर्रम पर ताजिये के जुलूस के रास्ते को लेकर था।

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