देशभर में भारतीय जनता पार्टी भले ही वंदे-मातरम के नाम पर राजनीती कर रही हो। लेकिन अपने खेल में बीजेपी खुद ही फसती हुई नज़र आ रही है। आजतक टीवी चैनल के एक डिबेट शो में वंदे-मातरम को स्कूलों और सरकारी संस्थानों में अनिवार्य करने के हक़ में बीजेपी मिनिस्टर बलदेव सिंह ओलख शामिल हुए थे। लेकिन जब एंकर ने उनसे वंदे-मातरम की 2 लाइनें गाने को कहा तो मंत्री जी वही फंस गए।

मंत्री जी पूरा वंदे-मातरम तो दूर एक लाइन तक नहीं गा पाए। UP सरकार में माइनॉरिटी वेलफेयर मिनिस्टर से एंकर ने बार-बार गीत गाने की मांग की लेकिन एक शब्द भी मंत्री जी के मुहं से नहीं निकला। जबकि मंत्री जी सबको शिक्षा दे रहे थे कि वंदे-मातरम सबको आना चाहिए। जो बीजेपी देश को देशभक्ति सीखा रही थी उसके नेताओं को राष्ट्रीय गीत नहीं आता। वहीँ पैनल में बैठे शाक्षी महाराज ने कहा कि वनडे मातरम न आना दुर्भाग्य है लेकिन फिर भी इसे किसी पर थोपना नहीं चाहिए।

बीजेपी मंत्री जो वंदे-मातरम के नाम पर ज्ञान दे रहे थे उनको इस गीत की एक लाइन नहीं आती थी। तो अब सवाल खड़े होते है कि क्या बीजेपी वंदे-मातरम के नाम पर सिर्फ राजनीती कर रही है ? क्या देश सम्प्रदायकिता फैला कर बीजेपी सिर्फ वोट पाना चाहती थी ? किसी को उसकी मर्ज़ी के खिलाफ कुछ करने को कहना कहा का लोकतंत्र है ?

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