जर्मन अर्थशास्त्री नॉर्बर्ट हैरिंग ने नोटबंदी को लेकर एक चौंकाने वाला खुलासा किया है। उन्होंने दावा किया है कि भारत में नोटबंदी के फैसले के पीछे अमेरिका का हाथ है।

हैरिंग ने कहा कि अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा ने भारत के साथ बेहतर विदेश नीतियों को बढ़ावा देने के लिए सामरिक साझेदारी का ऐलान किया था। इस साझेदारी के बारे में अमेरिकी सरकार की विकास एजेंसी यूएसएआईडी ने भारतीय वित्त मंत्रालय के साथ सहयोग समझौतों पर बातचीत की थी। इसमें एक गोल यह भी था कि भारत में कैश को पीछे छोड़कर डिजिटल पेमेंट को बढ़ावा दिया जाएगा।

हैरिंग के मुताबिक नोटबंदी के चार हफ्ते पहले यूएसएआईडी ने कैटलिस्ट नाम की स्कीम शुरू की, जिसका उद्देश्य भारत में कैशलेस पेमेंट्स को बढ़ावा देना था। 14 अक्टूबर की प्रेस रिलीज़ कहती है कि कैटलिस्ट यूएसएआईडी और वित्त मंत्रालय के बीच साझेदारी का अगला दौर है।

लेकिन अब यूएसएआईडी की वेबसाइट पर मौजूद प्रेस रिलीज में यह बयान नहीं मिलेगा। बेमतलब दिखाई देने वाला यह बयान उस वक्त सच साबित हुआ जब 8 नवंबर को पीएम मोदी ने नोटबंदी का ऐलान किया।

हैरिंग ने कहा कि कैटलिस्ट के प्रोजेक्ट डायरेक्टर आलोक गुप्ता हैं जो वॉशिंगटन के वर्ल्ड रिसोर्स इंस्टिट्यूट के सीओओ रहे हैं। वह उस टीम का हिस्सा भी रहे हैं, जिन्होंने भारत में आधार सिस्टम को डिवेलप किया।

वहीं स्नैपडील के पूर्व वाइस प्रेजिडेंट बादल मलिक को कैटलिस्ट का सीईओ बनाया गया है। उन्होंने अपने भाषण में कहा था कि कैटलिस्ट का मिशन कम आय वाले ग्राहकों और मर्चेंट्स के बीच डिजिटल पेमेंट्स में आने वाली समस्याओं को दूर करना है। हम एक स्थायी मॉडल बनाना चाहते हैं, लेकिन सरकार को भी इसके लिए काम करना होगा।