देश भर में किसानों की बढ़ती आत्महत्या को लेकर कई जगह आंदोलन चल रहे हैं। वहीं जनता के सेवक कहे जाने वाले कई सांसदों ने अपना वेतन बढ़ाने की मांग की है।

लोकसभा में सांसदों द्वारा वेतन बढ़ाने की मांग पर सांसद वरुण गाँधी ने सवाल उठाते हुए कहा, ‘वेतन के मामलों को बार-बार उठाया जाता है, यह मुझे सदन की नैतिक परिधि के बारे में चिंतित करता है। पिछले एक साल में करीब 18,000 किसानों ने आत्महत्या की है। हमारा ध्यान कहां हैं?’

भाजपा सांसद वरुण गाँधी ने शून्यकाल में इस विषय को उठाते हुए कहा, ‘राजकोष से अपने स्वयं के वित्तीय संकलन को बढ़ाने का अधिकार हथियाना हमारी प्रजातान्त्रिक नैतिकता के अनुरूप नहीं है। इस देश की बेहतरी के लिए, हमें वेतन तय करने के लिए एक स्वतंत्र बाहरी निकाय बनाना होगा।

वरुण ने आगे कहा, यदि हम स्वयं को विनियमित करते हैं और देश के हालात तथा समाज में अंतिम व्यक्ति की आर्थिक स्थितियों पर विचार करते हैं, तो हमें कम से कम इस संसद की अवधि के लिए अपने विशेषाधिकारों को छोड़ देना चाहिए।

वरुण गांधी ने महात्मा गांधी का ज़िक्र करते हुए कहा कि, महात्मा गांधी ने कहा था कि ‘मेरी राय में सांसदों और विधायकों द्वारा लिए जा रहे भत्ते उनके द्वारा राष्ट्र के लिए दी गयी सेवाओं के अनुपात में होना चाहिए।

भाजपा सदस्य ने कहा, ‘पिछले एक दशक में ब्रिटेन के 13 प्रतिशत की तुलना में हमने अपने वेतन 400 प्रतिशत बढ़ाये हैं, क्या हमने सही में इतनी भारी उपलब्धि अर्जित की है?, जबकि हम अपने पिछले दो दशक के प्रदर्शन पर नजर डालें तो मात्र 50 प्रतिशत विधेयक संसदीय समितियों से जांच के बाद पारित किए गए हैं।

बता दें कि, समूचे देश से किसानों की खुदखुशी का मामला सामने आ रहा है। मध्य प्रदेश की शिवराज सरकार ने खुद मानसून सत्र में सदन को बताया था कि राज्य में पिछले 13 साल में 15,129 किसान और खेतीहर मजदूर मौत को गले लगा चुके हैं।

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