एऩडीए (राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन) की ओर से रामनाथ कोविंद को राष्ट्रपति पद का उम्मीदवार बनाया गया है। कोविंद बिहार के राज्यपाल है वह भारतीय जनता पार्टी से दो बार राज्यसभा सदस्य चुने जा चुके हैं।

रामनाथ कोविंद के नाम के बाद चर्चा उनके कामकाज व स्वभाव की कम हो रही है उनकी जाति पर ज्यादा फोकस किया जा रहा है। राजनीतिक जानकार कोविंद के नाम के बाद भाजपा का दलित मास्टर स्ट्रोक बताते थक नहीं रहे हैं।

मुख्यधारा की मीडिया दलित जाति के नाम पर बह गई है। दलित-दलित चिल्लाकर कोविंद की जीत पक्की कराने में लगी हुई है।

लेकिन रामनाथ कोविंद के नाम के बाद भी भाजपा के प्रति दलितों का गुस्सा कम नहीं हो रहा है। दलित चिंतक लगातार दलितों पर अत्याचार के समय रामनाथ कोविंद का क्या रूख था इस बात पर चर्चा कर रहे हैं।

रोहित वेमुला की संस्थानिक हत्या, गुजरात के ऊना में दलितों पर बरपा अत्याचार, उत्तर प्रदेश के योगीराज में जलता सहारनपुर तब कहां थे रामनाथ कोविंद ?  उनका दलित होना औऱ उनका दलित स्वाभीमान जागना कहां था जब इतनी ज्यादा बेरहमी दलितों पर हो रही है।

क्योंकि नहीं कोई आपत्ति या निंदात्मक बयान रोहित वेमुला की संस्थानिक हत्या के समय सामने आया था ?  अभी योगीराज में सहारनपुर जल रहा है क्यों नहीं कोई सरकारी पहल रामनाथ कोविंद की तरफ से होती हुई दिखाई दी थी ?

ऐसे तमाम सवाल है जो दलित चिंतक व लोग रामनाथ कोविंद को लेकर उठा रहे हैँ।

वहीं 17 दलों के विपक्ष से भी लोग गुहार लगा रहे हैं कि पूरा विपक्ष एकजुट होकर क्यों नहीं एक ऐसी मां को राष्ट्रपति पद का उम्मीदवार बनाते हैं जिसने अपने बेटे को खो दिया। वह भी ख़ास जाति के होने की वजह से ।

सोशल मीडिया पर लोगों ने मांग की कि, राधिका वेमुला को विपक्ष की ओर से राष्ट्रपति पद का उम्मीदवार बनाया जाए।

आपको बता दें कि, आगामी 22 जून को 17 दल बैठक करेंगे उसमें राष्ट्रपति पद के नाम को लेकर फैसला करेंगे।

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