लोकसभा उपचुनाव के नतीजे आने के बाद मीडिया भाजपा की हार से ज़्यादा बिहार के अररिया में कथित तौर पर पाकिस्तान के समर्थन में लगे नारों को दिखा रहा है। ये वीडियो सोशल मीडिया पर भी वायरल हुआ है। लेकिन क्या ये वीडियो सही है या जेएनयू के वीडियो की तरह फर्ज़ी।

बता दें, कि बिहार के अरिया में हुए लोकसभा उपचुनाव में आरजेडी ने जीत हासिल की है। भाजपा ने यहाँ जीतने के लिए एड़ी-चोटी का ज़ोर लगाया लेकिन वो यहाँ नहीं जीत पाई। बिहार के भाजपा नेता गिरिराज सिंह ने हार के बाद कहा था कि अरिया आतंकवादियों का गढ़ बन जाएगा। इसके कुछ देर बाद ही ये वीडियो सामने आ गया।

फेक न्यूज़ की जांच करने वाली न्यूज़ वेबसाइट altnews की खबर के अनुसार ये वीडियो फर्ज़ी है। इस वीडियो की कई तरह से जाँच करने के बाद ये बात सामने आई है कि वीडियो के साथ छेड़छाड़ की गई है।

वीडियो को ध्यान से देखा जाए तो “पाकिस्तान जिंदाबाद और भारत तेरे टुकड़े होंगे’ का नारा और वीडियो में मौजूद युवा के बोलने का समय यानि लिप्सिंग एक नहीं है। altnews ने ट्विटर, व्हाट्स एप और यूट्यूब पर मौजूद वीडियो की अलग-अलग ऑडियो सॉफ्टवेर (Audacity, Spek) पर जांच की।

जांच में सामने आया की ऑडियो में दो जगह आवाज़ ज़ीरो है यानि बंद है। 0.000 से 0.140 सेकंड और 18.500 से 19.400 सेकंड के बीच आवाज़ बंद है। ये ऑडियो के वही हिस्से हैं जहाँ देशविरोधी नारे लगे हैं।

पूरे ऑडियो के दौरान टुकटुक और ट्रैफिक की आवाज़ आ रही है लेकिन जब नारे लगने वाला हिस्सा आता है तो ये आवाज़ अचानक गायब हो जाती है। मतलब असली आवाज़ को बंद कर नारों को ऑडियो एडिटिंग के द्वारा विडियो में डाला गया है।

इसी तरह विडियो की जांच ffmpeg सॉफ्टवेर पर की गई। जिस समय नारों की आवाज़ आती है उस हिस्से को 30 फ्रेमों में बाटा गया। वीडियो फ्रेम में जैसे देखा जा सकता है कि दाया तरफ खड़ा युवा लगातार अपना मुह खोले हुए है और उसके होठ आपस में मिले नहीं हैं। वहीं बाया तरफ खड़ा युवा अपना मुह लगातार बंद करे हुए हैं। जबकि नारे लगाने के लिए लगातार मुह चलते रहना चाहिए था।

इस पूरी जांच से ये बात सामने आती है कि ये वीडियो पूरी तरह एडिट किया हुआ है। मेनस्ट्रीम मीडिया ने बिना जांच के न्यूज़ चैनल पर इस वीडियो को दिखाया। बता दें, कि जेएनयू में भी कथित तौर पर देशविरोधी नारे लगने का जब वीडियो सामने आया था उसे भी मीडिया ने इसी तरह बिना जांच के दिखाया था। वो वीडियो भी बाद में फर्ज़ी निकला था।

सोशल मीडिया पर फर्ज़ी विडियो वायरल होना बड़ी बात नहीं है। सवाल ये है कि मेनस्ट्रीम मीडिया क्यूँ बार-बार एक ही तरह की गलती को दोहरा रहा है। क्या मीडिया किसी के निर्देश पर काम कर रहा है जिसके चलते वो अपनी विश्वसनीयता को मिटटी में मिलाता जा रहा है।

 

 

Loading...
loading...