कहीं ‘जनादेश-हड़प’ चल रहा है तो कहीं राज्यसभा की एक सीट के लिए ‘विधायक तोड़ो’ या ‘विधायक डराओ’ अभियान चल रहा है। विपक्ष शासित प्रदेश में अर्द्धसैनिक बल के सहयोग से विपक्षी नेता पर अंधाधुंध छापेमारी चल रही है।

पिछले कुछ समय की घटनाओं से ऐसा लग रहा है, मानो सारे करप्ट केवल विपक्षी दलों में हैं। ‘व्यापम’ से लेकर ‘पनामा’ में एक से बढ़कर एक ‘देशभक्त-रत्नों’ के नाम हैं। पर छापे सिर्फ विपक्षियों या आलोचकों पर!

सोचिए, संसद और विधानसभा के चुनावों से ऐन पहले अगर विपक्षी उम्मीदवारों पर छापेमारी या उनकी खरीददारी होने लगी तो भारत के गणतंत्र और लोकतंत्र का क्या होगा???

Loading...
loading...