आज हमारे मुल्क को क्या हो गया है? कहीं धर्म के नाम पर आतंकवादी हमला, तो कहीं संस्कृति के नाम पर भीड़ द्वारा इंसानों की हत्या। यह सब एक खतरनाक साजिश का हिस्सा है, मानवता के खिलाफ।

हम युवाओं को सोचना होगा कि हमें क्या चाहिए? जाति, धर्म, संस्कृति के नाम पर हिंसा या सामाजिक समरसता एवं शान्ति? मुद्दा हर बार भले ही अलग हो, लेकिन हत्या हर बार मानवता की ही होती है।

अमरनाथ यात्रियों पर हुए आतंकवादी हमले की समाज के हर तबक़े को एक स्वर में भर्त्सना करनी चाहिए।

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