इस साल पन्द्रह अगस्त को जब आप शान से तिरंगा झंडा लहरा कर अपने देशभक्त होने पर गर्व कर रहे होंगे,

ठीक उसी समय एक जेल में एक कमज़ोर महिला एक कोठरी में अकेले पड़ी हुई अपने देश और देशवासियों के लिए बिताये गए अपने सालों के अतीत पर नज़र डाल रही होगी,

वह महिला पेशे से इंजीनियर है,

उसका अपराध यह है कि उसने नौकरी नहीं करी,

वह महिला मुंबई के मशहूर स्टीफेन कालेज में पढ़ी,

उसने गाँव के गरीबों के साथ काम करने का फैसला किया,

जब सरकार ने एक बड़ा बाँध बनाने के लिए नर्मदा नदी के किनारे रहने वाले लाखों लोगों को उजाड़ना शुरू किया,

तो इस महिला ने सरकार से बात करने की कोशिश करी,

लेकिन सरकार ने गाँव वालों की और इस महिला की बात नहीं सुनी,

यह महिला तीस साल इन गाँव वालों के लिए सरकार से लड़ती रही,

गुजरात का मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी इस महिला से बहुत चिढ़ता था,

जब गुजरात में मुसलमानों के खिलाफ दंगे करवाए गए,

तो यह गांधीवादी महिला गुजरात गई,

मुख्यमंत्री के लोगों ने इस महिला का सर पकड़ कर दीवार पर मारा था,

लेकिन यह महिला नहीं डरी और अपनी बात पर अड़ी रही,

उस समय का मुख्यमंत्री अब प्रधानमंत्री बन गया,

प्रधानमंत्री ने अपनी पुरानी दुश्मनी निकालने के लिए इस महिला को जेल में डलवा दिया,

अब यह महिला मध्य प्रदेश की जेल में है,

इस महिला का नाम मेधा पाटकर है,

यह नाना पाटेकर जैसे डायलॉग तो नहीं बोलती लेकिन इसे लाखों लोग अपना साथी मानते हैं,

जब देश अपनी आज़ादी का जश्न मनायेगा,

देश की नदियों, जंगलों और लोगों को बचाने वाली यह महिला जेल में होगी,

आपको खुद की देशभक्ति दिखानी पड़ती है,

इसलिए आप सिनेमा में राष्ट्रगान पर खड़े न होने वालों को ठोकरें मारते हैं,

ताकि लोग आपको देशभक्त समझें,

लेकिन कुछ लोगों को अपना देश प्रेम दिखाना नहीं पड़ता,

उनका देश प्रेम ज़रा अलग तरह का होता है,

सलाम मेधा.

 लेखक : हिमांशु कुमार
यह पोस्ट लेखक के फेसबुक वॉल से ली गई है। जिसे बोलता हिंदुस्तान ने अपने सोशलवाणी में जगह दी है।
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