नौजवानों को डिबेट दे दो, वे बिना नौकरी के जवानी काट देंगे….

नौजवानों, नौकरी की बात कब होगी, आपकी जवानी का कारवां लुट रहा है, उसकी बात कब होगी, कब पूछोगे अपनी अपनी सरकारों से नौकरी का हिसाब कहां हैं। हर सरकार के पास श्रम मंत्री है, वो क्यों नहीं बताता कि उसकी सरकार में इस महीने या पिछले महीने कितनी नौकरियां निकली हैं। क्या भारत के नौजवानों को नौकरी नहीं करनी है, क्या उनके लिए रोज़गार के सवाल का कभी कोई मतलब नहीं होगा।

हमारी आपकी सबकी ज़िंदगी नौकरी की चर्चा में गुज़रती है, फिर हमारे आपके सवाल नौकरी को लेकर क्यों नहीं हैं कि नौकरी कहां हैं। संगठित असंगठित सेक्टर में कितना रोज़गार पैदा हुआ, कभी इसका डेटा, कभी उसका डेटा, मानो न मानो, मगर सरकार को तो अपना डेटा बता सकती है कि रेल से लेकर शिक्षा में कितनी वेेकैंसी आई, कितनों की प्रक्रिया पूरी हुई, कितनों की नौकरी में ज्वाइनिंग हो गई।

यही सवाल आप हर सरकारों से कीजिए। नहीं करेंगे तो वो भी बोल दीजिए कि ठाकुर हमें तीन तलाक का मुद्दा दे दो, हम उसी को गींजते गांजते जवानी गुज़ार देंगे। आपमें से कई नौजवानों ने लिखा कि बेरोज़गारी का मुद्दा उठाएं मगर आप बताइये कि आप क्यों नहीं उठाते हैं।

फर्ज़ीवाड़ा इतना है कि नौकरी पर बहस करने के लिए कोई मुकम्मल और समग्र आंकड़ा नहीं है। पता नहीं चलता है कि दुनिया किस तरफ जा रही है और क्या हो रहा है। आखिर ये कैसे हो रहा है कि हर फालतू सवाल नौकरी के सवाल पर भारी पड़ जाती है। मैं आपके पोस्ट देखता रहता हूं। आपके अपने पेज पर नौकरी की चर्चा नहीं है।

पिछले महीने आपके फीडबैक के आधार पर एक लेख लिखा था कि हर राज्य और हर सरकार आराम से नौजवानों को नौकरी देने के नाम पर झांसा देती है और उसके बाद नहीं देकर भी टहला लेेती है। इतने जागरूक जवानों से भरे दौर में राजनीति कितनी फोकट की हो गई है।

आप अपने अनुभव जब भी लिखें, विस्तार से बताएं, कब फार्म निकला, कितने का फार्म था, क्या योग्यता थी, कब पहला इम्तहान हुई, क्या क्या विवाद हुई, कितने दिनों बाद कौन सी परीक्षा हुई और बताइये। ईमानदारी से सूचना दें। अपना नंबर देना न भूलें।

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