द वायर की एक खबर के मुताबिक, देश की सरकारी कंपनियां, इंडियन ऑइल कॉर्पोरेशन (आईऑसी) और गेल इंडिया, ने उद्योगपति गौतम अडानी के गुजरात और ओड़िसा के एलएनजी टर्मिनलों में हिस्सादारी खरीदी है। सरकारी कंपनियों द्वारा इस निजी कंपनी में हिस्सेदारी खरीदने पर सवाल उठ रहे हैं। गौरतलब है कि इन दोनों सरकारी कंपनियों में केंद्र सरकार की सबसे ज़्यादा हिस्सेदारी है।

विशेषज्ञों का कहना है कि इन टर्मिनलों में निवेश कर सरकारी कम्पनियाँ अप्रत्यक्ष रूप से कर्ज़ में डूबे अडानी समूह को फायदा पहुंचा रही हैं। गौरतलब है कि गौतम अडानी को प्रधानमंत्री मोदी का करीबी माना जाता है। मोदी सरकार पर गौतम अडानी को फायदा पहुँचाने के आरोप भी लग चुके हैं।

कर्ज़ में डूबी कंपनी में निवेश क्यों?

आईऑसी के एक पूर्व चेयरमैन ने नाम न बताने की शर्त पर कहा कि, आईऑसी क्यों एक ऐसी निजी परियोजना में निवेश कर रही है जो कर्ज़ में डूबी है। “अगर उसे निवेश करना ही था तो छोटा निवेश हो सकता था लेकिन इतना ज़्यादा निवेश करना कैसे सही है।”

उल्लेखनीय है कि अडानी समूह पर वर्तमान में 72000 करोड़ रुपये बैंकों का कर्ज़ है। देश में किसी भी उद्योगपति पर ये सबसे ज़्यादा कर्ज़ है।

आईऑसी और गैल इंडिया ने अडानी समूह के उड़ीसा टर्मिनल में 49% हिस्सेदारी खरीदी है। इस टर्मिनल का मूल्य 6 हज़ार करोड़ रुपये है। वहीँ अडानी समूह के गुजरात टर्मिनल में आईऑसी ने 50% हिस्सेदारी खरीदी है। इस टर्मिनल का मूल्य 5 हज़ार 40 करोड़ रुपये है।

निवेश के कारण सरकारी कंपनियों के शेयरों में गिरावट

अडानी समूह में निवेश करने के फैसले के कारण आईऑसी और गेल इंडिया के शेयरों में भी गिरावट आई। जब 2 सितम्बर 2016 को आईऑसी और गेल इंडिया ने अडानी समूह के उड़ीसा टर्मिनल में निवेश करने की घोषणा की तब आईऑसी के शेयरों में 2% और गेल इंडिया के शेयरों में 0.78% की गिरावट आई। जबकि उस दिन निफ्टी में 2.12% का उछाल आया था।

जब आईऑसी ने 5 अगस्त 2017 को अडानी समूह के गुजरात टर्मिनल में निवेश करने की घोषणा कि तब उसके शेयरों में 4.84% की बड़ी गिरावट आई।

अब ख़बरें आ रही है कि इस खबर को छापने वाले न्यूज़ पोर्टल द वायर के खिलाफ अडानी ने 100 करोड़ की मानहानि का केस किया है।

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